कराधान और मुद्रास्फीति पर इसका प्रभाव

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यह लेख स्किलआर्बिट्रेज से रिमोट फ्रीलांसिंग और प्रोफाइल बिल्डिंग प्रोग्राम का अनुसरण करने वाले Sujit Kumar Sircar द्वारा लिखा गया है और Shashwat Kaushik द्वारा संपादित किया गया है। इस लेख में कराधान (टैक्सेशन) और मुद्रास्फीति (इनफ्लेशन) पर उसके प्रभाव पर चर्चा करता है। इस लेख का अनुवाद Shreya Prakash के द्वारा किया गया है।

परिचय

देश की अर्थव्यवस्था को चलाने के लिए हर सरकार एक निश्चित कर लगाती है ताकि सरकार देश की प्रगति के लिए कुछ धन जुटा सके। देश के सभी ढांचागत विकास, सार्वजनिक सेवाएँ, उत्पादन और वितरण प्रणाली सहित उपभोग, इन करों पर निर्भर करते हैं।

मुद्रास्फीति एक अन्य पैरामीटर है जो विभिन्न करों के परिणामस्वरूप विकसित हुआ है। इसलिए, यह समझना बहुत जरूरी है कि ये दोनों आर्थिक मानदंड आपस में कैसे जुड़े हुए हैं। इसके संबंध को समझने से न केवल सरकारी नीति निर्माताओं को बल्कि आम जनता को भी मदद मिलेगी।

इसलिए, आइए इस लेख में कराधान के लाभों और अर्थव्यवस्था पर इसके हानिकारक प्रभावों को समझें।

कराधान क्या है

करों और मुद्रास्फीति के बीच संबंधों को समझने से पहले, आइए कराधान की एक वैचारिक समझ विकसित करें। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप किस देश में रहते हैं, किसी भी देश की सरकार अपने नागरिकों, विभिन्न व्यवसायों, या किसी अन्य एजेंसियों पर कुछ कर लगाएगी जो राजस्व उत्पन्न करने में सक्षम हैं।

कर कई रूपों में हो सकते हैं, और करों के कुछ सामान्य रूप निम्नलिखित हैं:

  • आय कर
  • उपभोग कर
  • सम्पत्ति कर
  • कंपनी कर
  • मनोरंजन कर

कर तब से अस्तित्व में हैं जब से लोग सभ्य हुए हैं, और जिसने भी देश या राज्य पर शासन किया उसने किसी न किसी रूप में कर लागू किया है। लोग उस अवधि के दौरान नामित सरकारी अधिकारियों को धन या किसी अन्य उचित माध्यम से कर का भुगतान करते रहे हैं।

करों के प्रकार

आइए उपरोक्त प्रकार के करों को अलग-अलग समझने का प्रयास करें:

आय कर

हम सभी अपना घर चलाने के लिए आवश्यक सामान खरीदने के लिए अपनी आय अर्जित करने का प्रयास करेंगे। सरकार आम तौर पर हमारी आय पर आयकर के रूप में एक विशेष कर लगाती है। हालाँकि, यह कर हमारी कमाई पर निर्भर करेगा। जितनी अधिक आय होगी, कर भी उतना अधिक होगा।

सरकारी नीति निर्माता एक सीमा बनाएंगे जिसके आगे आपकी आय कर योग्य होगी। अगर आपकी आय कम है तो आपकी आय पर कोई कर नहीं लगेगा। सरकार यह सीमा महंगाई दर के आधार पर तय करेगी।

उपभोग कर

कुछ उपभोग कर हैं जिनसे हममें से अधिकांश लोग परिचित हैं, जैसे वैट (मूल्य वर्धित (एडेड) कर), बिक्री कर इत्यादि, जिसका हम कोई भी उत्पाद या सेवाएँ खरीदते समय व्यापारी को भुगतान करते रहे हैं।

अक्सर, ये कर हममें से कई लोगों के लिए बहुत अधिक हो सकते हैं, इसलिए ऐसे करों के कारण हमारी खरीदने की शक्ति गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है।

सम्पत्ति कर

हममें से अधिकांश के पास रहने के लिए एक घर है, जिसे संपत्ति कहा जाता है, और सरकार ऐसी संपत्ति के मालिक होने के लिए एक विशेष कर भी लगा सकती है, जो उस संपत्ति के बाजार मूल्य पर निर्भर करेगा।

भारत में सभी राज्य सरकारें संपत्ति मालिकों पर ऐसा संपत्ति कर लगाती हैं, जो संबंधित राज्य सरकारों के लिए राजस्व के प्राथमिक स्रोतों में से एक है। अक्सर, ऐसे कर अधिक भी हो सकते हैं।

कंपनी कर

जो लोग व्यवसाय के मालिक हैं वे अपने व्यवसाय से लाभ कमा सकते हैं, जहां सरकार एक कर लगाएगी, जिसे कंपनी कर के रूप में जाना जाता है। देश के संबंधित राज्य ऐसे करों की दर तय करते हैं।

व्यवसायों द्वारा किया गया निवेश अक्सर इस कंपनी कर पर निर्भर करता है, जो देश की आर्थिक वृद्धि के कारकों में से एक है।

मनोरंजन कर

कर का एक अन्य रूप, जिसे मनोरंजन कर कहा जाता है, हम पर तब लगाया जाता है जब हम निम्नलिखित में से किसी एक का आनंद लेते हैं:

  • मूवी 
  • प्रदर्शनियों
  • खेलने का कार्यक्रम
  • टीवी पर वीडियो स्ट्रीम करना

इस कर का फैसला भी राज्य सरकार करती है। सरकार अक्सर इस कर को माफ कर सकती है यदि उन्हें लगता है कि इस तरह के मनोरंजन को जनता को शिक्षित करने या देश की प्रगति को लाभ पहुंचाने के लिए बढ़ावा दिया जा सकता है। यह कराधान का एक और अप्रत्यक्ष रूप है।

मुद्रास्फीति क्या है

कराधान या कई अन्य कारणों से कीमतों में वृद्धि हो सकती है जो उपभोक्ता की खरीदने के शक्ति को प्रभावित कर सकती है, जिसे मुद्रास्फीति के रूप में जाना जाता है। सरकार को इस महत्वपूर्ण आर्थिक पैरामीटर पर अवश्य विचार करना चाहिए, जो देश की अर्थव्यवस्था को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।

ऐसी स्थिति में जहां मुद्रास्फीति बहुत अधिक है, रिजर्व बैंक मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए हस्तक्षेप कर सकता है और आर्थिक स्थिति का विश्लेषण कर सकता है।

आइए मुद्रास्फीति की इस अवधारणा को सरल बनाने के लिए यहां एक सरल उदाहरण लें। जब हम अपने भोजन, कपड़े या अन्य आवश्यक वस्तुओं को खरीदने के लिए बाजार जाते हैं, तो हमें अचानक पता चलता है कि हमारा पैसा सामान खरीदने के लिए अपर्याप्त है। चाहे नया घर किराए पर लेना हो या नई कार खरीदना हो, कीमतें पहले की तुलना में काफी अधिक हैं। इसका कारण मुद्रास्फीति है।

हालाँकि, यह समझना आवश्यक है कि मुद्रास्फीति लाभ और हानि दोनों प्रदान कर सकती है।

मुद्रास्फीति के लाभ

मुद्रास्फीति के लाभ निम्नलिखित है:

  • मुद्रास्फीति किसी देश की अर्थव्यवस्था में वृद्धि को बढ़ावा दे सकती है।
  • मुद्रास्फीति आपको अपने नियोक्ता से वेतन वृद्धि के लिए पूछने का अवसर प्रदान कर सकती है।
  • जब मुद्रास्फीति मध्यम होती है, तो विभिन्न वस्तुओं की कीमतों को समायोजित किया जा सकता है।
  • मुद्रास्फीति का व्युत्क्रम (इनवर्स) अपस्फीति (डिफ्लेशन) है। मुद्रास्फीति अपस्फीति को रोकेगी, क्योंकि यह देश में मंदी (रिसेशन) पैदा कर सकती है।

मुद्रास्फीति के नुकसान

मुद्रास्फीति के नुकसान निम्नलिखित है:

  • आपके पैसे का खरीद मूल्य घट जाता है।
  • यदि आपका नियोक्ता आपको पर्याप्त वेतन नहीं देता है, तो आपके लिए अपनी आवश्यक वस्तुएं खरीदना मुश्किल हो जाता है।
  • कारोबारी कोई भी निवेश करने से बचते हैं।
  • अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में देश की प्रतिस्पर्धात्मकता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
  • यदि मुद्रास्फीति नियंत्रण से बाहर हो तो किसी देश की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

करों का मुद्रास्फीति पर क्या प्रभाव पड़ता है?

आइए अब हम यहां चर्चा करें कि कैसे मुद्रास्फीति कराधान पर कई प्रभाव डाल सकती है। आपमें से कई लोगों ने इसका अनुभव भी किया होगा, जब मुद्रास्फीति के कारण आपका वेतन बढ़ गया था, और परिणामस्वरूप, आप पाएंगे कि आपको उच्च कर ब्रैकेट में धकेल दिया गया है और आप अधिक आयकर का भुगतान कर सकते हैं।

आप अक्सर आश्चर्यचकित हो सकते हैं कि क्या आपको अपनी वेतन वृद्धि से वास्तव में खुश होना चाहिए, क्योंकि आपकी शुद्ध आय में उतनी वृद्धि नहीं हुई है जितनी मूल्य वृद्धि का आप सामना कर रहे हैं। विशेष रूप से उन लोगों के लिए जिनकी निश्चित आय है, मुद्रास्फीति उन्हें संघर्ष करने के लिए मजबूर कर सकती है क्योंकि वे अधिक कर चुका रहे हैं।

कराधान और मुद्रास्फीति के बीच संबंधों को समझना काफी जटिल हो सकता है। कराधान कभी-कभी मुद्रास्फीति को भी कम कर देता है। जब सरकार आर्थिक विकास को बढ़ावा देने और बुनियादी ढांचे और सार्वजनिक सेवाओं का निर्माण करने के लिए कर लगाती है, तो यह मुद्रास्फीति को कम कर सकती है।

दूसरी ओर, यदि करों के परिणामस्वरूप गैर-विकास-संबंधी सरकारी व्यय होते हैं, तो यह घाटे और बढ़ी हुई उधारी के साथ समाप्त हो सकता है। परिणामस्वरूप, यह मुद्रा आपूर्ति का विस्तार करेगा और मुद्रास्फीति का कारण बनेगा।

मुद्रास्फीति और करों के बीच संबंध

आइए अब मुद्रास्फीति और करों के बीच संबंध स्थापित करने के कुछ और उदाहरणों पर चर्चा करें।

सरकार ब्याज दर बढ़ा सकती है

सरकार मुद्रास्फीति दर पर लगातार नजर रखेगी। यदि यह वांछित लक्ष्य से अधिक हो जाता है, तो देश का रिज़र्व बैंक, बैंक ब्याज दरों में वृद्धि करके इसे संतुलित करने का प्रयास करेगा। ऐसा करने से धन आपूर्ति नियंत्रण में रहेगी और उधार लेने की लागत में वृद्धि होगी। ऊंची ब्याज दरें बहुत अधिक आर्थिक गतिविधियों को हतोत्साहित कर सकती हैं और मुद्रास्फीति के दबाव को कम कर सकती हैं।

कराधान और मौद्रिक नीति

रिज़र्व बैंक की महत्वपूर्ण भूमिकाओं में से एक स्थिर मूल्य बनाए रखना है। इसलिए, यह आवश्यक है कि कराधान नीति देश की मौद्रिक नीति के अनुरूप हो क्योंकि यह मुद्रास्फीति को प्रभावित कर सकती है। कर परिवर्तन अल्प और मध्यम अवधि में कीमतों और मुद्रास्फीति पर भी प्रभाव डाल सकते हैं।

कर संरचनाएं मानव और भौतिक पूंजी और श्रम आपूर्ति में निवेश के लिए प्रोत्साहन को प्रभावित करते हुए दीर्घकालिक आर्थिक गतिशीलता को भी नियंत्रित कर सकती हैं।

कराधान और सरकारी खर्च

इसके अलावा, सरकारें सरकारी खर्च को कम करके और अपनी कर नीतियों में बदलाव करके मुद्रास्फीति को नियंत्रित कर सकती हैं। यदि उचित नियंत्रण के बिना अनावश्यक खर्चे होंगे तो अर्थव्यवस्था असंतुलित हो सकती है और इसके परिणामस्वरूप अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति का दबाव पैदा होगा।

राजकोषीय असंतुलन से बजट घाटा हो सकता है, जिसके लिए सरकारी बॉन्ड जारी करने की आवश्यकता होती है, जो धन आपूर्ति का विस्तार करता है और मुद्रास्फीति को बढ़ावा देने का जोखिम उठाता है।

कारोबार पर असर पड़ता है

जब ऐसी स्थिति विकसित होती है और मुद्रास्फीति दर बदलती रहती है, तो व्यक्तिगत संपत्ति कर का मूल्यांकन बहुत जटिल हो जाता है। ऐसी स्थिति में, व्यवसाय संपत्ति के प्रकार के आधार पर उसका मूल्य तय नहीं कर सकते हैं।

परिणामस्वरूप, कराधान और उत्पादन लागत में वृद्धि के कारण, लाभ मार्जिन कम हो जाएगा, और आगे कोई निवेश नहीं होगा। मुद्रास्फीति मजदूरी और परिचालन लागत को भी बढ़ा सकती है, लाभ मार्जिन को और भी कम कर सकती है और आगे की व्यावसायिक योजना और विकास में बाधा उत्पन्न कर सकती है।

अर्थव्यवस्था पर असर पड़ता है

मुद्रास्फीति का महत्वपूर्ण प्रभाव न केवल कम खरीदारी शक्ति होगा, बल्कि यह अधिक वेतन मांग भी पैदा करेगा, जिससे अधिक छंटनी होगी। राष्ट्रीय मुद्रा का मूल्य घट सकता है, जिससे देश के घरेलू उत्पाद वैश्विक बाजार में कम प्रतिस्पर्धी हो जायेंगे।

कराधान और मुद्रास्फीति नीतियों को राजस्व सृजन और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाना चाहिए, क्योंकि उच्च मुद्रास्फीति आत्मविश्वास को कम कर सकती है, अर्थव्यवस्था को अस्थिर कर सकती है और वैश्विक बाजारों में व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा को नुकसान पहुंचा सकती है।

उपभोक्ता मांग और खर्च पैटर्न

इसमें कोई संदेह नहीं है कि कराधान मुद्रास्फीति और उपभोक्ता मांग को प्रभावित करेगा। यदि अधिक उपभोग कर लगाया जाता है, तो इससे खरीदने की शक्ति कम हो जाएगी, जिससे अपस्फीति को बढ़ावा मिल सकता है।

दूसरी ओर, उपभोग कर में कमी से खर्च योग्य आय उत्पन्न होगी, मांग बढ़ेगी और मुद्रास्फीति प्रभावित होगी। भोजन और ईंधन जैसी आवश्यक वस्तुओं पर कर की दरें समग्र मूल्य स्तर को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करती हैं।

निवेश और आर्थिक विकास के लिए प्रोत्साहन

विकासशील और विकसित देशों में, आर्थिक विकास को संतुलित करने के लिए अक्सर कर रियायतें दी जाती हैं। आयकर या आयात शुल्क कम करने जैसे कुछ प्रोत्साहन की पेशकश की जाती है।

हालाँकि, आलोचक अक्सर इस बात पर बहस करते हैं कि क्या इस तरह के लाभ राजस्व घाटे को उचित ठहरा सकते हैं, क्योंकि अगर मांग आपूर्ति से अधिक है तो कम कंपनी कर भी मुद्रास्फीति को बढ़ा सकते हैं।

निष्कर्ष

कराधान और मुद्रास्फीति के बीच संबंध को समझना काफी जटिल है। केवल अर्थशास्त्री (इकोसिस्टम) ही इसे बेहतर समझ सकते हैं और सुझाव दे सकते हैं कि सरकार इसे संतुलित करने के लिए नीतियां बनायें। आख़िरकार, कराधान विभिन्न सार्वजनिक सेवाओं, उत्पादन और वितरण प्रणालियों को वित्तपोषित करके देश की अर्थव्यवस्था को नियंत्रित कर सकता है।

देश की अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति की भी महत्वपूर्ण भूमिका है, क्योंकि यह अर्थव्यवस्था को नुकसान और फायदा दोनों पहुंचा सकती है। मुद्रास्फीति का मध्यम स्तर किसी देश की अर्थव्यवस्था के विकास को बढ़ावा दे सकता है। हालाँकि, बहुत अधिक मुद्रास्फीति अर्थव्यवस्था को अस्थिर कर सकती है। मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने में कर विशेष भूमिका निभा सकते हैं।

देश की सरकार को अच्छी आर्थिक नीतियां विकसित करके अर्थव्यवस्था को प्रबंधित करने के लिए एक संतुलनकारी कार्य करना चाहिए ताकि मुद्रास्फीति स्वस्थ रहे, सरकारी खर्च नियंत्रण में रह सके और व्यापारिक समुदाय द्वारा निवेश बढ़े। कराधान और मुद्रास्फीति पर सरकार की नीति देश के नागरिकों, व्यवसायों और पूरे देश की अर्थव्यवस्था के रूप में हम सभी को प्रभावित कर सकती है।

संदर्भ

 

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