बॉन्ड और डिबेंचर के बीच अंतर

0
92
Difference between debenture and bond

इस लेख को सिम्बायोसिस लॉ स्कूल, नोएडा के बीबीए.एलएलबी की छात्रा Anindita Deb ने लिखा है। इस लेख में, लेखक डिबेंचर और बॉन्ड के वित्तीय साधनों को नियंत्रित करने वाले कानूनी प्रावधानों के साथ-साथ इन दोनों के बीच अंतर पर चर्चा करती है। इस लेख का अनुवाद Sakshi Gupta के द्वारा किया गया है।

परिचय

यदि आप एक उद्यमी (एंटरप्रेनॉरियल) उत्साही हैं या कंपनी कानून में रुचि रखते हैं, तो आपको पता होना चाहिए कि डिबेंचर और बॉन्ड किसी भी कंपनी के लिए अपरिहार्य (इंडिस्पेंसेबल) वित्तीय साधन हैं। यदि किसी संगठन को बुनियादी आवश्यकताओं के लिए धन की आवश्यकता होती है, जैसे व्यवसाय शुरू करना या उसका विस्तार करना, तो उधार लेना आवश्यक धन प्राप्त करने का सबसे सामान्य तरीका है। कंपनियां कई तरह से उधार ले सकती हैं, जिनमें से सबसे आम बॉन्ड और डिबेंचर हैं। डिबेंचर और बॉन्ड दोनों उधार लेने के साधन हैं जिनका उपयोग कई देशों में एक दूसरे के स्थान पर किया जाता है। हालाँकि, ये दो अलग-अलग निवेश उपकरण हैं। आइए हम इस लेख में बॉन्ड और डिबेंचर के बीच के अंतर की जांच करें।

अर्थ

बॉन्ड

बॉन्ड सुरक्षित निवेश हैं क्योंकि ये संपार्श्विक (कोलेटरल) द्वारा समर्थित हैं। बॉन्ड में, परिसंपत्ति (ऐसेट) को ऋण देने के लिए संपार्श्विक के रूप में गिरवी रखा जाता है ताकि यदि जारीकर्ता (इश्यूअर) राशि का भुगतान करने में विफल रहता है, तो बॉन्डधारक अपने कर्ज का भुगतान करने के लिए संपत्ति बेच सकें।

बॉन्ड एक विशिष्ट अवधि के लिए जारी किए जाते हैं। एक बॉन्ड के ब्याज का भुगतान नियमित अंतराल पर किया जाता है जिसे कूपन के रूप में जाना जाता है। एक बॉन्ड को कभी-कभी सेवानिवृत्त (रिटायर्ड) लोगों के लिए आय के नियमित स्रोत (सोर्स) के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। परिपक्वता (मैच्योरिटी) तिथि भविष्य की वह तिथि होती है जब आपकी बॉन्ड अवधि समाप्त हो जाती है।

डिबेंचर

एक डिबेंचर एक अन्य प्रकार की ऋण प्रतिभूति (सिक्योरिटी) है जो आमतौर पर असुरक्षित होती है। बॉन्ड और डिबेंचर दोनों प्रकार के धन प्रदान करने वाले हैं, लेकिन डिबेंचर अधिक विशिष्ट हैं। डिबेंचर जारीकर्ता की किसी भी परिसंपत्ति द्वारा समर्थित नहीं होते हैं और इस प्रकार जारीकर्ता में निवेशक के विश्वास पर पूरी तरह से भरोसा करते हैं। जारीकर्ता एक विशिष्ट आवश्यकता को पूरा करने के लिए डिबेंचर जारी करता है, जैसे नआनी वाले खर्च या फंड विस्तार। क्योंकि डिबेंचर के मामले में जुटाई गई पूंजी उधार ली गई पूंजी होती है, डिबेंचर धारकों को कंपनी का लेनदार (क्रेडीटर) माना जाता है।

चुकौती का तरीका

बॉन्ड

एक बॉन्ड खरीदने का चयन करके, आप जारीकर्ता को ऋण देते हैं, जो एक विशिष्ट तिथि पर ऋण के अंकित मूल्य को चुकाने के लिए सहमत होता है और आपको समय-समय पर, आमतौर पर वर्ष में दो बार ब्याज का भुगतान करता है। स्टॉक के विपरीत, कॉरपोरेट बॉन्ड आपको कोई स्वामित्व अधिकार नहीं देते हैं।

डिबेंचर

देय तिथि पर, कंपनी के पास मूल पुनर्भुगतान के लिए दो सामान्य विकल्प होते हैं। वे एकमुश्त (लम सम) या किश्तों में भुगतान कर सकते हैं। किस्त योजना को “डिबेंचर रिडेम्पशन रिजर्व” के रूप में जाना जाता है और कंपनी निवेशक को परिपक्वता तक हर साल एक निश्चित राशि का भुगतान करती है। अंतर्निहित (अंडरलाइंग) दस्तावेज़ीकरण (डॉक्यूमेंटेशन) में डिबेंचर शर्तें शामिल होंती है।

प्रकार

बॉन्ड

सरकारी प्रतिभूति बॉन्ड

भारत की केंद्र या राज्य सरकारों द्वारा जारी एक ऋण साधन एक सरकारी प्रतिभूति बॉन्ड है। सरकारी प्रतिभूतियां (जी-सेक), जो मुख्य रूप से 5 से 40 वर्षों के बीच लंबी अवधि के निवेश की पेशकश करती हैं, में भारत में सरकारी बॉन्ड शामिल हैं। राज्य विकास ऋण राज्य सरकार द्वारा जारी बॉन्ड होते हैं।

इन सरकारी प्रतिभूतियों को भारत सरकार द्वारा छोटे निवेशकों को मामूली रकम निवेश करने और कम जोखिम लेते हुए ब्याज अर्जित करने की अनुमति देने के लिए बनाया गया था। इन बॉन्डों में अर्ध-वार्षिक (सेमी एनुअल) ब्याज भुगतान होता है जो या तो तय या फ्लोटिंग हो सकता है। हालाँकि, अधिकांश सरकारी बॉन्ड पूर्व निर्धारित ब्याज दर पर पेश किए जाते हैं।

कॉर्पोरेट बॉन्ड 

कंपनियां निवेशकों से एक निश्चित अवधि के लिए पैसा उधार लेने के लिए कॉर्पोरेट बॉन्ड जारी करती हैं, जबकि उस अवधि के दौरान उनसे पूर्व निर्धारित ब्याज दर चार्ज करती हैं।

कंपनियां आम तौर पर निवेशकों को नई परियोजनाओं को फंड देने, उनके संचालन को बढा़ने या भविष्य में विस्तार करने के लिए बॉन्ड बेचती हैं। बैंकों से ऋण प्राप्त करने के बजाय, कंपनी निवेशकों से एक निश्चित अवधि के लिए रिटर्न की एक विशेष दर के बदले में अपना पैसा निवेश करने की मांग करती है।

अवधि समाप्त होने के बाद निवेशकों को अंकित मूल्य और ब्याज दर प्राप्त होती है। ऐसे निवेशक जो अपने निवेश की अवधि के लिए गारंटीकृत ब्याज दर अर्जित करना चाहते हैं, वे इस प्रकार के बॉन्ड को पसंद करते हैं।

परिवर्तनीय बॉन्ड 

इस प्रकार के बॉन्ड ऋण और इक्विटी दोनों के लाभ प्रदान करते हैं, लेकिन एक साथ नहीं। बॉन्डधारक इसे निर्दिष्ट संख्या में शेयरों में परिवर्तित कर सकते हैं, कंपनी के शेयरधारक बन सकते हैं और शेयरधारकों को प्रदान किए गए सभी पुरस्कार प्राप्त कर सकते हैं। परिवर्तनीय बॉन्ड खरीदने के बाद, निवेशक ऋण और इक्विटी दोनों साधनों से लाभान्वित हो सकते हैं।

शून्य-कूपन बॉन्ड

जैसा कि शीर्षक इंगित करता है, यह वित्तीय साधन ब्याज का भुगतान नहीं करता है। इसे “शुद्ध छूट बॉन्ड” के रूप में भी जाना जाता है, क्योंकि बॉन्ड परिपक्व होने तक, निवेश नियमित ब्याज दर नहीं देते हैं।

बॉन्ड का अंकित मूल्य, जो परिपक्व होने पर निवेशक को वापस कर दिया जाता है, मूल राशि पर वार्षिक रिटर्न के साथ जोड़ा जाता है।

मुद्रास्फीति (इनफ्लेशन) से जुड़े बॉन्ड

इस तरह के बॉन्ड का उद्देश्य निवेश के मुद्रास्फीति जोखिम को कम करना है जो मुख्य रूप से सरकार द्वारा जारी किया जाता है और मुद्रास्फीति से बचाता है। मुद्रास्फीति से जुड़े बॉन्ड में उनके मूलधन (प्रिंसिपल) और ब्याज दरों में मुद्रास्फीति के संबंध में परिवर्तन होता है।

आरबीआई बॉन्ड

फ्लोटिंग रेट सेविंग्स बॉन्ड 2020 (एफआरएसबी) जिसे आरबीआई जारी करता है, उसे आरबीआई बॉन्ड के रूप में भी जाना जाता है। ये 7-वर्ष के कर योग्य बॉन्ड हैं जिनकी ब्याज दर बॉन्ड की अवधि के दौरान बदलती रहती है। नतीजतन, परिपक्वता पर भुगतान किए जाने के बजाय, ब्याज दर हर छह महीने में बदल जाती है, पहला बदलाव 1 जनवरी, 2021 को होता है। जब अर्थव्यवस्था में ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो फ्लोटिंग ब्याज दर भी बढ़ सकती है।

संप्रभु सोना (सॉवरेन गोल्ड) बॉन्ड

केंद्र सरकार इन बॉन्डों को उन निवेशकों को जारी करती है जो सोने में निवेश करना चाहते हैं लेकिन अपने साथ भौतिक (फिजिकल) सोना नहीं रखना चाहते हैं। इस बॉन्ड का ब्याज जो निवेशक को मिलता है वह कराधान के अधीन नहीं होता है। यह देखते हुए कि यह सरकार द्वारा पेश किया जाता है, इसे अत्यधिक सुरक्षित बॉन्ड भी माना जाता है।

पहले पांच वर्षों के बाद, जो निवेशक अपने निवेश को लेना चाहते हैं, वे ऐसा कर सकते हैं; हालांकि, ऐसा करने से भविष्य में ब्याज भुगतान किए जाने की तारीख बदल जाती है।

डिबेंचर

पंजीकृत (रजिस्टर्ड) और वाहक (बेअरर) डिबेंचर

डिबेंचर के रूप में जारी किए जाने पर ऋण जारीकर्ता को पंजीकृत किया जा सकता है। इस मामले में, इन प्रतिभूतियों के हस्तांतरण (ट्रांसफर) या बिक्री को समाशोधन (क्लियरिंग) सुविधा के माध्यम से समन्वित (कोऑर्डिनेट) करने की आवश्यकता है जो जारीकर्ता को स्वामित्व परिवर्तन के बारे में सूचित करता है ताकि वे उपयुक्त बॉन्डधारक को ब्याज का भुगतान कर सकें। इसके विपरीत, जारीकर्ता के साथ एक वाहक डिबेंचर दायर नहीं किया जाता है। डिबेंचर का मालिक (वाहक) केवल बॉन्ड धारण करके ब्याज पाने का हकदार है।

प्रतिदेय (रिडीमेबल) और अप्रतिदेय (इर्रिडीमेबल) डिबेंचर

बॉन्ड के जारीकर्ता को अपने ऋण का पूर्ण पुनर्भुगतान करने के लिए सटीक शर्तों और तिथि का उल्लेख प्रतिदेय डिबेंचर में किया जाता है। दूसरी ओर, अप्रतिदेय (गैर-प्रतिदेय) डिबेंचर जारीकर्ता को समय सीमा तक पूर्ण रूप से चुकाने के लिए बाध्य नहीं करते हैं। जारी करने वाली कंपनी के विघटन (डिजोल्यूशन) के समय ही इन डिबेंचर को लिया जा सकता है। यही कारण है कि अप्रतिदेय डिबेंचर को स्थायी डिबेंचर भी कहा जाता है।

परिवर्तनीय और गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर

परिवर्तनीय डिबेंचर की एक निश्चित रूपांतरण अवधि होती है जिसके बाद उन्हें जारी करने वाली कंपनी के इक्विटी शेयरों में परिवर्तित किया जा सकता है। ये वित्तीय हाइब्रिड उपकरण ऋण और इक्विटी के लाभों को मिलाते हैं। डिबेंचर धारकों के पास या तो ऋण को परिपक्व होने तक रखने और ब्याज भुगतान एकत्र करने या इसे इक्विटी शेयरों में बदलने का विकल्प होता है। निवेशक जो अपने ऋण को इक्विटी में परिवर्तित करने की इच्छा रखते हैं, वे परिवर्तनीय डिबेंचर के लिए तैयार होते हैं यदि वे कंपनी के स्टॉक के मूल्य में दीर्घकालिक (लॉन्ग टर्म) लाभ की आशा करते हैं। परिवर्तनीय डिबेंचर अन्य निश्चित दर निवेशों की तुलना में कम ब्याज दर का भुगतान करते हैं, इसलिए इक्विटी में परिवर्तित करने का विकल्प एक लागत है।

पारंपरिक डिबेंचर जिन्हें जारी करने वाली कंपनी के स्टॉक में नहीं बदला जा सकता है, उन्हें गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर के रूप में जाना जाता है। परिवर्तनीय डिबेंचर की तुलना में निवेशकों को उच्च ब्याज दर के साथ पुरस्कृत किया जाता है ताकि परिवर्तनीयता की अनुपस्थिति की भरपाई की जा सके।

निवेश किसे करना चाहिए

बॉन्ड में

बॉन्ड निवेश कम जोखिम सहनशीलता वाले निवेशकों के लिए आदर्श हैं। डिबेंचर की तुलना में बॉन्ड अधिक सुरक्षित निवेश हैं। ये कम जोखिम वाले हैं, क्योंकि एक निर्दिष्ट अवधि के बाद, मूलधन और निश्चित ब्याज के भुगतान की गारंटी दी जाती है। इसके अतिरिक्त, क्योंकि ये प्रतिभूतियाँ किसी संपार्श्विक द्वारा समर्थित होती हैं, निवेशकों को परिपक्व होने पर भुगतान प्राप्त करने का आश्वासन दिया जाता है। बॉन्ड इसलिए उन लोगों के लिए दीर्घकालिक निवेश विकल्प के रूप में काम कर सकते हैं जिनके पास स्टॉक बाजार अनुभव की कमी है।

बॉन्ड में अक्सर कम जोखिम होता है। हालांकि, निवेशकों को मुद्रास्फीति के खतरे को ध्यान में रखना चाहिए, जिसके परिणामस्वरूप समय के साथ निवेश का मूल्य कम हो सकता है। बॉन्ड निवेश निवेशकों को आय का एक विश्वसनीय स्रोत भी देते हैं। इन बॉन्डों में निवेश कर वे अपने पोर्टफोलियो में विविधता लाने में भी सक्षम हो सकते हैं।

डिबेंचर में

उच्च जोखिम सहनशीलता वाले निवेशक डिबेंचर में निवेश करने पर विचार कर सकते हैं। जबकि डिबेंचर पर रिटर्न का अनुमान लगाया जा सकता है, इस बात का कोई आश्वासन नहीं है कि यह समान होगा। डिबेंचर में संपार्श्विक से कोई समर्थन नहीं होता है, जो उन्हें बॉन्ड से अधिक जोखिम भरा बनाता है। इसलिए निवेशकों को अच्छे निवेश करने के लिए अपनी साख और प्रतिष्ठा के आधार पर एक कंपनी का चयन करना चाहिए। डिबेंचर भी ब्याज दरों में बदलाव के लिए अतिसंवेदनशील होते हैं।

परिवर्तनीय होने पर डिबेंचर का लाभ होता है। यहां, निवेशक उन्हें कंपनी के स्टॉक शेयरों में बदल सकते हैं। डिबेंचर भी निवेशकों को बॉन्ड की तुलना में अधिक रिटर्न प्रदान करते हैं। हालांकि ये कुछ जोखिम के साथ आते हैं। निवेशकों को अपने निवेश पोर्टफोलियो में विविधता लाने में मदद करने के लिए, डिबेंचर एक अल्पकालिक निवेश विकल्प के रूप में काम कर सकते हैं।

अंतर का सारांश (सम्मरी)

निम्नलिखित टेबल उन सभी अंतरों को सारांशित करने में मदद करती है जिनकी हमने ऊपर चर्चा की है:

अंतर के आधार  बॉन्ड  डिबेंचर 
कार्यकाल अवधि लंबी अवधि का निवेश है। अल्पकालिक (शॉर्ट टर्म) निवेश है।
जोखिम का स्तर डिबेंचर की तुलना में कम जोखिम भरा है। बॉन्ड की तुलना में अधिक जोखिम भरा है।
संपार्श्विक आवश्यकता संपार्श्विक द्वारा समर्थित होने की आवश्यकता है। अधिकांश डिबेंचर संपार्श्विक-मुक्त होते हैं।
ब्याज की पेशकश पुनर्भुगतान के लिए उच्च स्थिरता के साथ कम ब्याज दर है। उच्च ब्याज दर क्योंकि संपार्श्विक द्वारा समर्थित नहीं है।
भुगतान मासिक या वार्षिक आधार पर किए गए भुगतान, जिनका कंपनी के बाजार प्रदर्शन से कोई संबंध नहीं है। किए गए भुगतान कंपनी के बाजार प्रदर्शन पर अत्यधिक निर्भर करते हैं।
किसके द्वारा जारी किए जाते है ज्यादातर सरकार और वित्तीय संस्थानों द्वारा जारी किए जाते है। ज्यादातर निजी कंपनियों द्वारा जारी किए जाते है।

निष्कर्ष

डिबेंचर और बॉन्ड दोनों आपके लिए निवेश करने के लिए उपलब्ध ऋण साधन हैं। लेकिन यह आप पर है कि आप जोखिम लेने वाले बनना चाहते हैं या इसे सुरक्षित रखना चाहते हैं। यदि आप जोखिम लेने वाले हैं, तो बॉन्ड आपका पसंदीदा विकल्प होगा। लेकिन अगर आप हिस्सेदारी लेना चाहते हैं, तो प्रतिष्ठित कंपनियों के डिबेंचर में निवेश करने से आपको कंपनी में आकर्षक ब्याज और इक्विटी मिलेगी। यदि आप खेल में नए हैं, तो यह अनुशंसा की जाती है कि आप बॉन्ड में निवेश करके शुरुआत करें और धीरे-धीरे डिबेंचर में निवेश का पता लगाएं। किसी भी तरह से, आपके विकल्पों और ब्याज दरों, पुनर्भुगतान की अवधि, आदि जैसे विभिन्न कारकों पर विचार करने के बाद दोनों में से किसी में भी निवेश किया जा सकता है।

संदर्भ

 

कोई जवाब दें

Please enter your comment!
Please enter your name here