ट्रेडमार्क और उसके प्रकार

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यह लेख लॉसिखो से इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी ,मीडिया एंड एंटरटेनमेंट लॉज़ में डिप्लोमा कर रही Aishwarya Parameshwaran द्वारा लिखा गया है। लेख का संपादन Aatima Bhatia (एसोसिएट, लॉसिखो) और Ruchika Mohapatra (एसोसिएट, लॉसिखो) द्वारा किया गया है।  यह लेख हमें ट्रेडमार्क की मूल बातें, विभिन्न प्रकार के ट्रेडमार्क क्या हैं और विभिन्न प्रकार के ट्रेडमार्क के महत्व के बारे में जानकारी देता है। इस लेख का अनुवाद Shubham Choube द्वारा किया गया है। 

परिचय

औद्योगिक संपत्ति और कॉपीराइट बौद्धिक संपदा (इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी) के दो विशेष विभाग हैं। पेटेंट, ट्रेडमार्क, औद्योगिक डिज़ाइन और मूल स्थान पदनाम को औद्योगिक संपत्ति का हिस्सा माना जाता है। कला, संगीत और साहित्य के सभी कार्य कॉपीराइट कानूनों के तहत विनियमित होते हैं। कलाकारों के प्रदर्शन में उनके अधिकार, फोनोग्राम निर्माताओं के अधिकार उनके अभिलेख (रिकॉर्डिंग्स) में, और प्रसारकों (ब्रॉड्कैस्टर) के अधिकार उनके रेडियो और टेलीविजन कार्यक्रमों में, सभी कॉपीराइट कानून के अंतर्गत आते हैं। सामान्य शब्दों में, बौद्धिक संपदा अधिकारों को अधिकार धारक को दिए गए विशेष अधिकारों के संग्रह के रूप में वर्णित किया जाता है। ‘बौद्धिक संपदा’ वाक्यांश वास्तविक बौद्धिक गतिविधि के बजाय कुछ कानूनी अधिकारों को संदर्भित करता है। इन बौद्धिक संपदा अधिकारों को समझना, उनकी रक्षा कैसे करें और अंततः उनका लाभ कैसे उठाया जाए, यह महत्वपूर्ण है। ट्रेडमार्क के इतिहास का पता व्यावसायिक गतिविधि की शुरुआत से लगाया जा सकता है।

जब भी हम किसी उत्पाद के बारे में सोचते हैं, तो हमारे दिमाग में स्वचालित रूप से ब्रांड का नाम और उसके प्रदाता (प्रोवाइडर) की तस्वीर आ जाती है। हमें प्रतिष्ठित विज्ञापन-गीत (जिंगल), प्रतीक चिह्न (लोगो) और उत्पाद की पैकेजिंग का रंग संयोजन भी याद है। ये संकेत, प्रतीक, प्रतीक चिह्न, विज्ञापन-गीत जो किसी उत्पाद को एक पहचान देते हैं, उसे उसका ट्रेडमार्क कहा जाता है।

ट्रेडमार्क एक बौद्धिक संपदा है जिसने उल्लेखनीय महत्व प्राप्त कर लिया है। आज, किसी उत्पाद के मालिक और निर्माता ट्रेडमार्क के महत्व और ऐसे ट्रेडमार्क के पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) पर मालिक को मिलने वाले अधिकारों के बारे में अच्छी तरह से जानते हैं। भारत में, कई प्रकार के ट्रेडमार्क हैं जिनके तहत ट्रेडमार्क का मालिक पंजीकरण पर कानूनी अधिकार और सुरक्षा मांग सकता है। इस लेख में हम ट्रेडमार्क की मूल बातें, विभिन्न प्रकार के ट्रेडमार्क क्या हैं और विभिन्न प्रकार के ट्रेडमार्क के महत्व को समझने जा रहे हैं।

ट्रेडमार्क क्या होता है?

यह एक ऐसा चिह्न है जो किसी उत्पाद को उसी वर्ग की अन्य वस्तुओं और सेवाओं से अलग करके उसकी पहचान करने में कुशलतापूर्वक मदद करता है। बाजार में प्रतिस्पर्धा (कॉम्पिटिशन) होने पर यह उत्पाद की पहचान करने में मदद करता है। ट्रेडमार्क अधिनियम, 1999 की धारा 2(zb) के अनुसार ट्रेडमार्क का अर्थ आलेखी (ग्राफिकल) प्रतिनिधित्व में सक्षम एक चिह्न है और जो बाजार में एक व्यक्ति के स्वामित्व वाली वस्तुओं और सेवाओं को अन्य लोगों से अलग करने में सक्षम है और इसमें सामान का आकार, रंगों का संयोजन और उनकी पैकेजिंग शामिल है। ट्रेडमार्क का प्राथमिक कार्य वस्तुओं और सेवाओं के समान वर्ग से संबंधित अन्य ब्रांडों से अलग दिखना है और इसलिए जो चिह्न विशिष्ट है वह सबसे अच्छा प्रकार का ट्रेडमार्क है।

Lawshikho

ट्रेडमार्क किसी प्रतीक, शब्द, वाक्यांश, डिज़ाइन, प्रतीक चिह्न या इन सभी के संयोजन के लिए सुरक्षा प्रदान करता है। यह किसी उत्पाद को एक पहचान देता है जो वस्तुओं या सेवाओं के स्रोत का प्रतिनिधित्व करता है। भारत में ट्रेडमार्क ट्रेडमार्क अधिनियम, 1999 और सामान्य कानून के तहत संरक्षित है। ट्रेडमार्क अधिनियम के अनुसार, अपना ट्रेडमार्क पंजीकृत करना अनिवार्य नहीं है। हालाँकि, एक बार पंजीकृत ट्रेडमार्क उसके मालिक को 10 वर्षों के लिए कानूनी अधिकार और सुरक्षा प्रदान करेगा, और नवीनीकरण (रिन्यूअल) पर ऐसी अवधि बढ़ा दी जाएगी। ट्रेडमार्क के लाभों में बाज़ार में आसानी, एक विशिष्ट पहचान बनाना और एक स्रोत पहचानकर्ता होना शामिल है।

ट्रेडमार्क के प्रकार

उत्पाद चिह्न

यह एक चिह्न है जिसका उपयोग उत्पादों या वस्तुओं के लिए किया जाता है लेकिन सेवाओं पर नहीं किया जाता है। उत्पाद चिह्न का उपयोग प्रदाता की पहचान करने, प्रतिष्ठा और उत्पाद की उत्पत्ति के लिए किया जाता है। ट्रेडमार्क के लिए वर्ग 1-34 ट्रेड मार्क्स नियम, 2002 की चौथी अनुसूची को आम तौर पर उत्पाद चिह्न कहा जाता है।

सेवा चिन्ह

यह एक उत्पाद चिह्न के समान है, लेकिन इसका उपयोग विशेष रूप से किसी उत्पाद के लिए नहीं बल्कि किसी सेवा की पहचान करने के लिए किया जाता है। ट्रेडमार्क के लिए वर्ग 35-45 ट्रेड मार्क्स नियम, 2002 की चौथी अनुसूची को सेवा चिह्न कहा जा सकता है।

शब्द चिह्न

आमतौर पर, ट्रेडमार्क को शब्द चिह्न या उपकरण चिह्न के तहत दर्ज किया जाता है। शब्द चिह्न में, ट्रेडमार्क को दर्शाने के लिए, बिना किसी शैलीकरण (स्टाइलाइज़ेशन) या अतिरिक्त कलात्मक (आर्टिस्टिक) तत्वों के केवल एक शब्द या वाक्य का उपयोग किया जाता है। इस प्रकार का पंजीकरण ट्रेडमार्क को व्यापक कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है क्योंकि यह मालिक को सभी शैलियों, रूपों और अभ्यावेदन (रिप्रेजेंटेशन) में ऐसे शब्द चिह्न का उपयोग करने की अनुमति देता है। पंजीकृत शब्द चिन्हों के कुछ उदाहरण लिटिल हार्ट्स, कोका-कोला हैं।शब्द चिह्न

उपकरण चिह्न

एक उपकरण चिह्न में आमतौर पर शब्द चिह्न के तत्व के अलावा एक कलात्मक तत्व जैसे प्रतीक, या एक कलात्मक या चित्रात्मक (पिक्टोरियल) चित्रण होता है। इसमें आम तौर पर कई कलात्मक तत्वों के साथ-साथ एक शब्द चिह्न भी शामिल होता है। उपकरण चिह्न में मौजूद ऐसे तत्व ट्रेडमार्क योग्य और गैर-ट्रेडमार्क योग्य सुविधाओं का संयोजन हो सकते हैं। इस प्रकार का चिह्न समग्र चिह्न पर सुरक्षा प्रदान करता है जिसे पंजीकृत किया जा रहा है लेकिन व्यक्तिगत तत्वों को नहीं। दिलचस्प बात यह है कि रंग में पंजीकृत होने पर उपकरण का चिह्न उस रंग संयोजन तक सुरक्षा में सीमित होता है जिसमें वह पंजीकृत होता है। हालाँकि, एक पंजीकृत उपकरण चिह्न जो काले और सफेद रंग का है, व्यापक सुरक्षा प्रदान करता है जिसमें मालिक ऐसे उपकरण पंजीकरण के लिए रंगों के लिए सुरक्षा का दावा कर सकता है।

प्रमाणपत्र ट्रेडमार्क

इन चिह्नों का उपयोग आमतौर पर मालिक द्वारा मूल, सामग्री, गुणवत्ता, निर्माण के तरीके या सेवाओं के प्रदर्शन और वस्तुओं या सेवाओं जिन पर वे लागू होते हैं की अन्य विशेषताओं को प्रमाणित करने के लिए किया जाता है। प्रमाणित चिह्नों के कुछ उदाहरणों में आईएसआई चिन्ह जो भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) द्वारा जारी किया जाता है, एजीमार्क जो भारत सरकार के विपणन और निरीक्षण (मार्केटिंग एंड इंस्पेक्शन) निदेशक (डायरेक्टर) द्वारा जारी किया जाता है, शामिल है।

सामूहिक ट्रेडमार्क

यह ट्रेडमार्क उन ट्रेडमार्क से भिन्न है जिनका हमने ऊपर अध्ययन किया है। इस प्रकार के चिह्न का उपयोग आमतौर पर किसी संगठन या सदस्यों के संघ द्वारा सदस्यों की वस्तुओं या सेवाओं को गैर-सदस्यों से अलग करने के लिए किया जाता है। इस प्रकार के ट्रेडमार्क का एक बहुत ही सामान्य उदाहरण सीए मार्क है जिसका उपयोग केवल चार्टर्ड अकाउंटेंट संस्थान के पंजीकृत सदस्यों द्वारा किया जा सकता है।

श्रृंखला ट्रेडमार्क

जब किसी मालिक के पास एक ही या समान सामान के संबंध में कई ट्रेडमार्क होते हैं, जिसमें सभी ट्रेडमार्क एक-दूसरे के साथ भौतिक (मैटेरियल) समानता रखते हैं और गैर-विशिष्ट चरित्र के संबंध में भिन्न होते हैं, तो ऐसे ट्रेडमार्क को श्रृंखला ट्रेडमार्क के रूप में पंजीकृत किया जा सकता है।

अपरंपरागत (अनकंवेंशनल) ट्रेडमार्क

ऊपर वे ट्रेडमार्क थे जो आम तौर पर पंजीकृत होते हैं। आइए अब कुछ अपरंपरागत ट्रेडमार्क को समझें।

रंग ट्रेडमार्क

चूंकि ट्रेडमार्क अधिनियम, 1999 के तहत ट्रेडमार्क की परिभाषा में ‘रंगों का संयोजन’ शब्द शामिल हैं, इसलिए वे ट्रेडमार्क के रूप में संरक्षित हैं। हालाँकि, रंग चिह्न के रूप में पंजीकृत होने के लिए रंगों का ऐसा संयोजन अद्वितीय (यूनिक), विशिष्ट होना चाहिए और उत्पाद और उसके स्रोत (सोर्सेज) की पहचान करनी चाहिए। नारंगी को इंगित करने के लिए लाल और पीले रंग का एक साधारण संयोजन विशिष्ट नहीं माना जाएगा। इस प्रकार के ट्रेडमार्क के तहत पंजीकृत होने का रंग बेहद अलग होना चाहिए और उपभोक्ताओं द्वारा पहचानने योग्य होना चाहिए।

ध्वनि ट्रेडमार्क

ट्रेडमार्क पंजीकरण में आलेखी प्रतिनिधित्व एक आवश्यक तत्व है और यह ध्वनि चिह्नों पर भी लागू होता है। ट्रेडमार्क के तहत किसी ध्वनि को पंजीकृत करने के लिए, यह ऐसे रूप में होना चाहिए कि यह उपभोक्ता द्वारा विशिष्ट और पहचाने जाने योग्य हो। टीएम मैनुअल के अनुसार ध्वनियों की कुछ श्रेणियों को ध्वनि चिह्न के रूप में पंजीकृत होने से विशेष रूप से बाहर रखा गया है। वे इस प्रकार हैं:

  • झंकार (चिम्स) के रूप में प्रयुक्त गाने,
  • 1 या 2 स्वरों वाले संगीत के सरल टुकड़े,
  • बच्चों की नर्सरी कविताएँ,
  • वह संगीत जो किसी विशेष क्षेत्र से दृढ़ता से जुड़ा हो,
  • लोकप्रिय गाना।

आकार ट्रेडमार्क

ट्रेडमार्क अधिनियम, 1999 के तहत ट्रेडमार्क की परिभाषा के अनुसार ‘वस्तुओं के आकार’ शब्द का उपयोग किया जाता है। इसलिए, ट्रेडमार्क अधिनियम, 1999 के तहत आकार चिह्नों को भी सुरक्षा प्रदान की जाती है। हालाँकि, अधिनियम की धारा 9(3) के तहत एक सीमा प्रदान की गई है, जिसमें यह स्पष्ट रूप से ट्रेडमार्क के पंजीकरण को बाहर करता है जिसमें केवल शामिल हैं:

  • आकृतियाँ जो वस्तु की प्रकृति से ही उत्पन्न होती हैं।
  • वे आकृतियाँ जो तकनीकी परिणाम प्राप्त करने के लिए आवश्यक हैं।
  • आकृतियाँ जो वस्तुओं में पर्याप्त मूल्य जोड़ती हैं।

इसके अतिरिक्त, जब ऐसा कोई आवेदन किया जाता है, तो यह माल के संबंध में होना चाहिए न कि माल के कंटेनर के संबंध में।

गंध ट्रेडमार्क

इस प्रकार के तहत पंजीकृत कुछ ट्रेडमार्क को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पंजीकरण की अनुमति दी गई है। हालाँकि, भारत में, किसी चिह्न को ट्रेडमार्क के रूप में अर्हता (क्वालीफाई) प्राप्त करने के लिए, उसे आलेखी रूप से प्रस्तुत करने में सक्षम होना चाहिए। इस तरह के प्रतिनिधित्व को जनता द्वारा जाना और पहचाना जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त, जो गंध कार्यात्मक (फंक्शनल) है उसे पंजिकृत नहीं किया जा सकता है।

इसके अलावा, ऐसी गंध जो कार्यात्मक या वर्णनात्मक (डिस्क्रिप्टिव) हो, उसे भी पंजीकरण नहीं दिया जा सकता है। उदाहरण के लिए, रासायनिक (केमिकल) गंध को छुपाने के लिए अतिरिक्त नाखून पालिश हटाने वाला परिमल (परफ्यूम) एक कार्यात्मक गंध के रूप में योग्य हो सकता है। एक गंध जो अवयवों (इंग्रीडिएंट्स) के संयोजन का प्राकृतिक परिणाम है, उसे भी ट्रेडमार्क के रूप में संरक्षित नहीं किया जा सकता है। यदि इस प्रकार के तहत ट्रेडमार्क के लिए कोई आवेदन इन परीक्षणों को पास करने और अपनी विशिष्टता साबित करने में सक्षम है, तो इसे ट्रेडमार्क के रूप में पंजीकृत किया जा सकता है।

ट्रेडमार्क के प्रकारों का महत्व

ट्रेडमार्क के लिए आवेदन करने से पहले, प्रत्येक प्रकार के ट्रेडमार्क के बीच अंतर को समझना महत्वपूर्ण है। सबसे पहले, ट्रेडमार्क अधिनियम, 1999 के तहत कानूनी सुरक्षा प्राप्त करने के लिए कोई चिह्न सामान्य नहीं होना चाहिए, यह अद्वितीय और विशिष्ट होना चाहिए। यदि आपका ट्रेडमार्क बाज़ार में मौजूद ट्रेडमार्क से थोड़ा-बहुत मिलता-जुलता लगता है, तो आप अपने ट्रेडमार्क को संशोधित करने पर विचार कर सकते हैं ताकि वह पंजीकृत होने के योग्य हो जाए।

ट्रेडमार्क की विशिष्टता अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह उत्पाद को पहचान देती है। ट्रेडमार्क के संबंध में कानूनों के विनियमन से पहले, बाजार में बहुत अस्पष्टता और भ्रम था। जनता से ब्रांड निष्ठा प्राप्त करना कठिन था क्योंकि वे वस्तुओं या सेवाओं के प्रदाता की तुरंत पहचान करने में सक्षम नहीं थे।

निष्कर्ष

यह समझना महत्वपूर्ण है कि प्रत्येक प्रकार का ट्रेडमार्क पंजीकृत होने से पहले मालिक को किस प्रकार की सुरक्षा प्रदान करता है। कारण यह है कि उन सभी में विशिष्ट तत्व और आवश्यक बातें शामिल हैं। ट्रेडमार्क एक महत्वपूर्ण उपकरण है जिसका उपयोग मालिक अपने ट्रेडमार्क के साथ-साथ अपने उत्पाद से कमाई करने के लिए कर सकता है। ट्रेडमार्क एक ढाल के रूप में भी कार्य करता है जो पंजीकृत ट्रेडमार्क मालिक के अधिकारों को बाजार में अन्य प्रतिस्पर्धियों से बचाता है। और अंत में, एक ट्रेडमार्क एक हथियार के रूप में कार्य करता है जिसमें मालिक उसे दिए गए अधिकारों का उपयोग कर सकता है और उसके ट्रेडमार्क का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर सकता है। इसलिए, किसी को उसके पंजीकरण से पहले ट्रेडमार्क और उसके प्रकारों को अत्यधिक महत्व देना चाहिए।

संदर्भ

  1. https://www.quickcompany.in/articles/types-of-trademark-in-india
  2. https://www.indiafilings.com/learn/types-of-trademark/
  3. https://legislative.gov.in/sites/default/files/A1999-47_0.pdf

 

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