रेमडेसिवीर की काला बाजारी

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Black marketing of remedisiver
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यह लेख Ms. Shivani Agarwal द्वारा लिखा गया है, जो वर्तमान में निरमा यूनिवर्सिटी के इंस्टिट्यूट ऑफ़ लॉ से बी.कॉम.एल.एल.बी. (ऑनर्स) कर रही हैं। यह एक व्यापक (कॉम्प्रिहेंसिव) लेख है जो रेमडेसिवीर दवा की कालाबाजारी (ब्लैक मार्केटिंग) और इसे रोकने के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा की गई कार्रवाई पर चर्चा करता है। इस लेख का अनुवाद Divyansha Saluja द्वारा किया गया है।

परिचय (इंट्रोडक्शन)

कोरोना वायरस रोग 2019 (कोविड-19), बीमारियों का एक समूह है, जिसमे गंभीर तीव्र श्वसन (सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी) सिंड्रोम की विशेषता है, जो निमोनिया और फेफड़ों के फेल होने जैसी प्रमुख श्वसन संबंधी बीमारियों को शामिल करता हैं। दुनिया भर के राष्ट्र, बड़ी संख्या में एक्सपेरिमेंट्स और विभिन्न अन्य गतिविधियों जैसे कि सूत्र (फार्मूला) विकसित करना, परीक्षण (टेस्ट) आदि आयोजित (कंडक्ट) करके इस महामारी से निपटने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं, लेकिन ऐसा कोई जीव्य (वाइबल) समाधान विकसित नहीं किया गया है।

कुछ लोगों ने इस कठोर स्थिति को एक व्यावसायिक अवसर के रूप में देखा और टीकाकरण (वक्सीनेशन) बाजार में अनुचित प्रथाओं के तहत काम करना शुरू कर दिया है। जबकि अस्पतालों में टीकों की कमी है, कुछ लोग या ‘डीलर’ टीकों की जमाखोरी (होर्डिंग) कर रहे हैं और लोगों को बहुत अधिक कीमत पर बेच रहे हैं। काला बाजार एक प्रकार का व्यवसाय है जो सरकार द्वारा स्वीकृत (अप्रूव्ड) चैनलों के बाहर होता है। एक काले बाजार में बेचे जाने वाले उत्पाद (प्रोडक्ट्स) और सेवाएं इस अर्थ में गैरकानूनी हो सकती हैं कि उनका अधिग्रहण (एक्वीजीशन) और बिक्री कानून द्वारा प्रतिबंधित (बैन) है, या वे कानूनी हो सकते हैं लेकिन करों (टैक्स) से बचने के लिए उनका लेन-देन किया जाता है। काला बाजार एक मंच है और यह भौतिक (फिजिकल) और साथ ही वर्चुअल भी हो सकता है, जहां सामान या सेवाओं को अवैध रूप से स्थानांतरित (ट्रांसफर) किया जाता है। उत्पादों और सेवाओं का अवैध (इल्लीगल) चरित्र, लेन-देन का गैरकानूनी चरित्र, या दोनों ही काला बाजार को बना सकते हैं। स्थानीय सरकारों को इन काले बाजारों को विनियमित (रेगुलेट) या संचालित (ऑपरेट) करना बहुत मुश्किल लगता है, क्योंकि इन बाजारों का पता लगाना या उन्हें देखना आसान नहीं है। एक काला बाजार की स्थिति तब उत्पन्न होती है, जब किसी विशेष उत्पाद/सेवा की बाजार में मांग में वृद्धि देखी जाती है, या जब लोग कर देनदारियों (लायबिलिटीज़) से बचना चाहते हैं, आदि।

उदाहरण के लिए, कोविशील्ड की 10 डोस की शीशी लगभग 20,000 रूपए में बेची जा रही है, जबकि जब हम कोवैक्सीन के रेट के बारे में बात करते हैं, तो इसे लगभग 25,000 रूपए में बेचा जा रहा है। इन शीशियों को विशाखापट्टनम से ठंडे पैक में ले जाया जाता है और उन व्यक्तियों को बेचा जाता है जो वैक्सीन वितरित (एडमिनिस्टर) करना चाहते हैं। शीशी प्राप्त करने के बाद, इसे घर पर रेफ्रिजरेटर में रखा जाता है। जो व्यक्ति टीकाकरण की शीशी प्राप्त करता है, वह 0.5 मिली. डोस और टीकाकरण की पूरी लागत को विभाजित (डिवाइड) करने के लिए 10 लोगों के समूह का आयोजन (ऑर्गनाइज) करता है। वे एक ही स्थान पर सभी 10 लोगों को टीका देने के लिए एक निजी स्वास्थ्य कार्यकर्ता (प्राइवेट हेल्थ वर्कर) को काम पर रखते हैं, और वे सेवा के साथ-साथ डिस्पोजेबल सुई और सिरिंज के लिए उन्हें भुगतान करते हैं। मिडिलमैन की रणनीति (स्ट्रेटजी), टीकाकरण की शीशियों की आकर्षक (लुक्रेटिव) पेशकश के साथ स्वास्थ्य कर्मचारियों को लुभाने की होती है। कोविड टीकाकरण केंद्र में, स्वास्थ्य अधिकारी, ज्यादा शीशियों को ले रहे हैं, यह कहते हुए कि अधिक व्यक्ति वैक्सीन लगवाने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। दिशानिर्देशों (गाइडलाइंस) के अनुसार, डोस की संख्या की डिलीवरी की परवाह किए बिना, इसकी सील तोड़ने के चार घंटे के अंदर- अंदर शीशी को फेंक दिया जाना चाहिए, लेकिन स्वास्थ्य कर्मचारियों ने कई पूर्ण डोस शीशियों को अलग रखा और लोगों को डोस देने के लिए मौजूदा शीशियों का इस्तेमाल किया है।

काला बाजारी करने वालों ने न केवल खुद को टीकाकरण तक सीमित कर लिया है, बल्कि उन्होंने खुद को ऑक्सीजन सिलेंडर को अवैध तरीके से बेचने की अनुचित प्रथाओं में भी शामिल कर लिया है। ऑक्सीजन की आपूर्ति (सप्लाई) हर अस्पताल का एक अहम हिस्सा है और महामारी के दौरान, बाजार में ऑक्सीजन सिलेंडरों अवैध बिक्री भी बढ़ने लगी है। जबकि अस्पतालों में बिस्तर और ऑक्सीजन की कमी हो रही है, ऑक्सीजन सिलेंडरों की काला बाजारी काफी हद तक विकसित होना शुरू हो गई है। लोग बहुत अधिक कीमत पर ऑक्सीजन सिलेंडर बेच रहे हैं और ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां जो लोग इसे खरीदने में सक्षम (एबल) नहीं थे, वे या तो गंभीर स्वास्थ्य स्थितियों का सामना कर रहे हैं या उनकी मृत्यु हो गई है।

कोविड -19 वैक्सीन के लिए अवैध तरीके से मांग में वृद्धि के महत्वपूर्ण कारणों में से एक, राज्य सरकार का 18 वर्ष से 44 वर्ष तक की आयु के लोगों के लिए टीकाकरण की पहली डोस शुरू करने से पहले, 45 वर्ष से अधिक उम्र के व्यक्तियों को टीकाकरण की दूसरी डोस देने का निर्णय है। इसका कारण यह है कि, 45 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को, जिन्होंने पहले ही पहली डोस लगवाली है, उन्हें दूसरी डोस लेना जरूरी है, जिससे की टीकाकरण का प्रभाव बना रहता है, यही कारण है कि 45 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए टीकों की मांग में वृद्धि हुई है, जिसके कारण 18-44 की उम्र के समूह से टीकों को हटा दिया जाता है। (क्योंकि दूसरी डोस की मांग अधिक है, तो यह काला बाजारियों को बाजार में अनुचित व्यापार की प्रथाओं का अभ्यास करने का अवसर देता है)। एक तरफ, कोरोना वायरस बीमारी और उससे होने वाली मौतों की घटनाओं के बढ़ने से युवा चिंतित हो रहे हैं और वहीं दूसरी ओर, कोविड -19 वैक्सीन का दुरुपयोग किया जा रहा है, क्योंकि राज्य द्वारा वैक्सीन की सभी उपलब्ध डोसेस का उपयोग करने के स्पष्ट निर्देश (डायरेक्टिव) के अनुसार, इसे केवल 45 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को दूसरी डोस के रूप में देना अनिवार्य है, लेकिन इसके बावजूद, स्वास्थ्य पेशेवरो (प्रोफेशनल्स) पर, स्थानीय राजनेताओं और अन्य शक्तिशाली व्यक्तियों द्वारा, बच्चों को वैक्सीन लगाने के लिए दबाव डाला जा रहा है।

कोविड-19 और रेमडेसिवीर इंजेक्शन

कोविड-19 के डायग्नोसिस के लिए, अभी तक कोई भी उपचार प्रभावी और सुरक्षित साबित नहीं हुआ है। रोग के एक्सपेरिमेंटल चरण (स्टेज) को देखते हुए, रेमडेसिवीर ने कुछ आशाजनक (प्रॉमिसिंग) लाभ दिखाए हैं, और स्थिति के शुरुआती चरणों में इसका उपयोग उचित है। रेमडेसिवीर, कोविड-19 का एक व्यवहार्य उपचार हो सकता है, लेकिन इसके प्रभाव (एफिकेसी), सहनशीलता (टोलरेबिलिटी) और सुरक्षा को निर्धारित (डिटरमाईन) करने के लिए इसे अच्छी तरह से डिजाइन किए गए क्लिनिकल ट्रायल के निष्कर्षों की आवश्यकता होगी।

इन विट्रो में सार्स-को.वी.-2 को दबाने की अपनी क्षमता (कैपेसिटी) के कारण, रेमडेसिवीर को कोविड-19 के संभावित चिकित्सीय (थेराप्यूटिक) विकल्प के रूप में जल्दी पहचाना गया था। इसके अलावा, एम.ई.आर.एस.-सी.ओ.वी. टीकाकरण के 12 घंटे बाद दिया गए रेमडेसिवीर ने, फेफड़ों के वायरल स्तर (लेवल) को कम किया और गैर-मानव (नॉन ह्यूमन) प्राइमेट में फेफड़ों के नुकसान को कम किया है।

रेमडेसिवीर की खोज, फार्मास्युटिकल फर्म गिलियड साइंसेज ने, हेपेटीटिस सी के इलाज के लिए की थी, लेकिन बाद में यह इबोला और एम.ई.आर.एस. के खिलाफ प्रभावी (इफेक्टिव) साबित हुआ। लैंसेट में प्रकाशित (पब्लिश) एक शोध (रिसर्च) के अनुसार, रेमडेसिवीर इन विट्रो में कोविड-19 के खिलाफ प्रभावी पाया गया था, लेकिन गंभीर रूप से बीमार रोगियों में पर्याप्त क्लिनिकल ​​​​सुधार का प्रदर्शन (डिमॉन्स्ट्रेट) नहीं किया।

रेमडेसिवीर का उद्देश्य रेप्लिकेशन के उस चरण को रोकना है जिसमें कोरोना वायरस अपने आप की कॉपीज बनाता है, जो फिर अनिश्चित (इंडेफिनेट) काल के लिए अपने आप की कॉपीज बनाते हैं। रेमडेसिवीर आर.डी.आर.पी. पर हमला करता है, जो इसका इंजन है। यह इंजन वायरल आर.एन.ए. से कच्चे माल (रॉ मैटेरियल) को संसाधित (प्रोसेस) करता है, जिसे रेप्लिकेट करने के लिए उस विशिष्ट (स्पेसिफिक) कार्य के साथ एक अन्य एंजाइम द्वारा तोड़ा जाता है। जब रेमडेसिवीर, अवरोधक (इन्हिबिटर), एक मरीज को दिया जाता है, तो यह इस सामग्री के हिस्से की नकल करता है और रेप्लिकेशन साइट में संपूर्ण होता है। वायरस अब बढ़ नहीं कर सकता क्योंकि रेमडेसिवीर ने उस पदार्थ को बदल दिया है जिसकी उसे आवश्यकता है।

यू.एस. एफ.डी.ए. ने रेमडेसिवीर, एक न्यूक्लियोटाइड एनालॉग प्रोड्रग (जो वायरल आर.एन.ए. पोलीमरेज़ को रोकता है) को 1 मई, 2020 को एक आपातकालीन उपयोग प्राधिकरण (इमर्जेंसी यूज ऑथराइजेशन) के रूप में मंजूरी दी थी। इबोला थेरेपी अध्ययन (स्टडी) को पूरी तरह देखने के बाद, हाल ही में कोविड-19 के उपचार में रेमडेसिवीर के उपयोग पर ध्यान केंद्रित किया गया है। रेमडेसिवीर, ज्यादातर एंटीवायरल दवाओं की तरह, बाद में महत्वपूर्ण चरण में देने के बजाए बीमारी के शुरुआती दौर में दिए जाने पर अधिक प्रभावी होता है। रेमडेसिवीर आर.एन.ए. पर निर्भर, आर.एन.ए. पोलीमरेज़ को रोकता है और इसके व्यापक कार्य के अनुसार आर.एन.ए. चेन टर्मिनेशन में देरी के माध्यम से, यह आर.एन.ए. उत्पादन (प्रोडक्शन) को रोकता है।

वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन (डब्ल्यू.एच.ओ.) ने भी कोरोना वायरस से पीड़ित रोगियों के लिए रेमडेसिवीर के उपयोग की सिफारिश की है। यह सिफारिश, क्लिनिकल ​​​​देखभाल विशेषज्ञों (एक्सपर्ट्स) के एक समूह द्वारा की गई थी। रेमडेसिवीर, कोरोना वायरस को वायरस के रेप्लिकेशन के लिए आवश्यक एक विशिष्ट एंजाइम उत्पन्न करने से रोकता है। ऐसा होने के बाद वायरस पूरे शरीर में नहीं फैल पाता है। अध्ययनों के अनुसार, जब हल्के-फुल्के कोविड-19 के रोगी व्यक्तियों को रेमडेसिवीर दिया जाता है, तो उनके लक्षण (सिंपटम्स) तेजी से ठीक हो जाते हैं। रोगियों द्वारा अस्पतालों में बिताए जाने वाले समय को कम करने के लिए, इस दवा का भी प्रदर्शन किया गया है। रेमडेसिवीर को गंभीर रूप से अस्वस्थ कोविड -19 रोगियों में मृत्यु दर में कमी होने से जोड़ा गया है

जब रोग की शुरुआत में इसे दिया जाता है, तो रेमडेसिवीर अधिक प्रभावी प्रतीत होता है। बीमारी की प्रगति की अनिश्चितता (अनप्रीडिक्टबिलिटी) और बड़े जनसांख्यिकीय भिन्नता (डेमोग्राफिक वेरियंस) को देखते हुए, यह चुनना चुनौतीपूर्ण हो जाता है कि कौन से व्यक्ति दवा प्राप्त करेंगे। जिसके परिणामस्वरुप, बड़ी संख्या में लोगों को दवा की आवश्यकता होगी, जिसे प्राप्त करना मुश्किल है और महंगा भी है।

कोविड -19 के उपचार के लिए बाजार में अन्य टीके हैं लेकिन रेमडेसिवीर के रोगियों पर कुछ अलग और कुशल (एफिशिएंट) परिणाम हैं। यह दवा, भारत में रोगियों में वायरल रेप्लिकेशन को कम करने में मदद करती है, लेकिन इस बात पर भी ध्यान दिया गया है कि मध्यम से गंभीर कोविड-19 के रोगियों का इलाज सही चरणों में ऑक्सीजन के उपचार, विटामिन की डोस, स्टेरॉयड और रक्त को पतला करने वाले मिश्रण (ब्लड थिनर्स) के साथ किया जा रहा है और यह सब मरीजों को तेजी से ठीक होने में मदद कर रहा है।

रेमडेसिवीर, वायरस को आर.एन.ए. को रेप्लिकेट करने के लिए आवश्यक एंजाइम्स में से एक के साथ हस्तक्षेप (इंटरफेयर) करके वायरस को बढ़ने से रोकता है। अन्य दवाएं वायरस से प्रेरित सूजन को कम करने में मदद करती हैं।

गंभीर कोविड-19 वाले व्यक्तियों, जिन्हें हाई फ्लो ऑक्सीजन या मेकेनिकल वेंटिलेशन की आवश्यकता होती है, में रेमडेसिवीर के खतरे और लाभ अज्ञात हैं। रेमडेसिवीर के नुकसान का खतरा कम है, लेकिन यह जानना महत्वपूर्ण है कि कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स के साथ उपयोग करने पर इसका कोई योगशील (एडिटिव) प्रभाव पड़ता है या नहीं। इम्युनोमोड्यूलेटर और मोनोक्लोनल एंटीबॉडी जैसी इन्वेस्टिगेशनल दवाओं का अध्ययन गंभीर रूप से बीमार रोगियों में प्लेसबो-नियंत्रित दृष्टिकोण (एप्रोच) का उपयोग करके किया जाना चाहिए, ताकि यह देखा जा सके कि वे रेमडेसिवीर के साथ कैसे प्रभाव डालते हैं।

रेमडेसिवीर के प्रभाव को देखते हुए, दुनिया भर की सरकारों ने टीकाकरण के उपयोग के लिए कुछ दिशानिर्देश (गाइडलाइंस) जारी करना शुरू कर दिया है। उदाहरण के लिए, जब हम अमेरिका के बारे में बात करते हैं, तो वहां की सरकार ने विभिन्न श्रेणियों (कैटेगरीज) के रोगियों जैसे रेनल इनसफीशिएंसी, गर्भवती महिलाओं, आदि पर डोस का परीक्षण (टेस्ट) किया है

लॉकडाउन और सामाजिक अलगाव (सोशल आइसोलेशन) जैसे राष्ट्रीय और राज्य सरकारों द्वारा उठाए गए सभी आक्रामक (एग्रेसिव) कदमों के बावजूद, भारत में कोविड-19 पॉजिटिव रोगियों की संख्या में वृद्धि जारी है।

रेमडेसिवीर के साथ हाल के उत्कृष्ट (एक्सीलेंट) विकास के परिणामस्वरूप, अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने के लिए तैयार रहना चाहिए कि रेमडेसिवीर इतनी बड़ी आबादी को अच्छे दामों पर उपलब्ध हो।

भारत में, सिप्ला कम्पनी रेमडेसिवीर का निर्माण करती है और कंपनी ने कहा है कि देश में कोरोना वायरस संक्रमण की एक बड़ी दूसरी लहर के बीच उत्पादन में तेजी लाने के लिए व्यापार को आगे बढ़ाने के बाद, कोविड-19 रेमडेसिवीर दवा का निर्माण, उसकी मांग की तुलना में बढ़ने लगा था। सिप्ला का मासिक (मंथली) रेमडेसिवीर उत्पादन अब पिछले साल, महामारी की अंतिम लहर में उत्पादित 200,000 से 300,000 शीशियों की तुलना में 5 गुना अधिक है। इसके अलावा, इस व्यापार ने भारत में मर्क और एली लिली के साथ मर्क की इन्वेस्टीगेशनल कोविड-19 दवा, मोलनुपिरावीर और लिली की गठिया (आर्थरिटीज़) की दवा, बारिसिटिनिब के निर्माण और वितरण (डिस्ट्रिब्यूशन) के लिए लाइसेंसिंग व्यवस्था हासिल की है, और इसका उपयोग कोविड-19 के इलाज के लिए भी किया जाता है।

रेमडेसिवीर को, भारत में एक नई दवा होने के नाते, बिक्री के लिए स्वीकृत होने से पहले एक क्लिनिकल ट्रायल से गुजरना होगा। क्लिनिकल ट्रायल रूल्स-2019 के अनुसार, यदि इसे यू.एस.-एफ.डी.ए. द्वारा स्वीकृत किया जाता है, तो ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डी.सी.जी.आई.) इसकी सुरक्षा पर सावधानीपूर्वक नजर रखते हुए, असामान्य परिस्थितियों में स्थानीय क्लिनिकल ​​​​परीक्षण में इसे छूट देने की क्षमता रखते है। सिप्ला और हेटेरो लैब्स लिमिटेड, दो भारतीय दवा कंपनियों ने हाल ही में क्लिनिकल ​​परीक्षण में छूट के लिए डी.सी.जी.आई. को आवेदन (एप्लाई) किया है।

रेमडेसिवीर टीकाकरण बाजार में एक मजबूत और व्यवहार्य विकल्प है। भारत में चिकित्सा अधिकारियों और साथ ही स्थानीय सरकारों ने रेमडेसिवीर के प्रभाव को देखा है, चिकित्सा विशेषज्ञों द्वारा रेमडेसिवीर के उपयोग की सिफारिश की गई है। हालांकि, टीकाकरण बाजार, कई नए उत्पाद दिखा रहा है जैसे कि स्पुतनिक वी. जिसे रूस में विकसित किया गया है, फाइजर वैक्सीन आदि। दवाओं के कुछ अलग कॉम्बिनेशन के साथ रेमडेसिवीर का उपयोग इस बीमारी को कम करने की संभावना रखता है।

रेमडेसिवीर इंजेक्शन की काला बाजारी

जैसे कि पहले चर्चा की गई है, काला बाजार एक ऐसा बाजार है जहां लोग अवैध व्यापार में लिप्त (एंगेज) होते हैं। काला बाजारी में या तो जो उत्पाद या सेवा खरीदी और बेची जा रही है वह अवैध होती है या जिस चैनल के माध्यम से बाजार में उत्पाद या सेवाओं की पेशकश की जाती है वह अवैध होता है या दोनों ही चीजें हो सकती हैं। देश में रेमडेसिवीर की काला बाजारी भी बढ़ने लगी है।

पुनर्उद्देश्य (रीपर्पज) की गई दवा बनाने वाली कंपनी, गिलियड लाइफ साइंसेज ने इसे बनाने के लिए 6 भारतीय फर्मों को लाइसेंस दिया है। माल बनाने के लिए, उनमें से ज्यादातर, कॉन्ट्रैक्ट निर्माताओं और उनकी सहायक कंपनियों पर निर्भर थे। जनवरी में देश में महामारी की शुरुआती लहर आने के बाद, इसकी मांग अनिवार्य रूप से न के बराबर थी। ज्यादातर फर्मों ने उत्पादन के लिए नए ऑर्डर लेना बंद कर दिया था क्योंकि इसकी कोई मांग नहीं थी, न तो उत्पादकों और न ही नीति निर्माताओं (पॉलिसी मेकर्स) ने दूसरी लहर के आने का अनुमान लगाया था और इसलिए वह जीवन रक्षक दवा को इकट्ठा करने में विफल रहे थे।

मार्च-अप्रैल में, रेमडेसिवीर का उत्पादन पूरी क्षमता से किया गया था, जिसमें हर महीने 25-30 लाख शीशियों का निर्माण किया जाता था। सरकार द्वारा कंपनियों को क्षमता बढ़ाने की अनुमति दिए जाने के बाद, भारत, अप्रैल तक प्रति माह 38.8 लाख शीशियों का उत्पादन कर रहा था। हेटरो ड्रग्स सबसे बड़ा उत्पादक था, जो कुल क्षमता का 33% (एक महीने में 13 लाख शीशियां बनाने) के लिए जिम्मेदार था। सिप्ला के पास बाजार का 20% या 7.6 लाख शीशियाँ थीं, जबकि जाइडस काडिला के पास 16% या 6.1 लाख शीशियाँ थीं। माइलान लैब्स, 5 लाख शीशियों का उत्पादन कर रही थी, जो कुल क्षमता का 13% थी। डॉ. रेड्डीज लैब्स, सिनजीन और जुबिलेंट इंग्रेविया प्रत्येक ने हर महीने 2.4 लाख शीशियों का उत्पादन किया, जो कुल उत्पादन का 6% था।

मई 2021 के महीने में वर्तमान उत्पादन लगभग 85 लाख था और इसके और बढ़ने की उम्मीद थी। महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश जैसे कई राज्य, इस समय रेमडेसिवीर दवा के स्टॉक की कमी का सामना कर रहे हैं या वह खत्म हो रहे हैं। इसके लिए केंद्र सरकार ने योजना बनाना शुरू कर दिया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, सभी 7 व्यवसाय महाराष्ट्र की आपूर्ति करेंगे: ज़ायडस कैडिला, हेरेरो, माइलान, सिप्ला, सिनजीन/सन, जुबिलेंट और डॉ रेड्डीज। गुजरात को महाराष्ट्र के बाद 1,82,500 शीशियों का दूसरा सबसे बड़ा आवंटन (अलॉटमेंट) प्राप्त होगा। डॉ रेड्डीज की फर्म को छोड़कर, गुजरात में 6 फर्मों द्वारा आपूर्ति की जाएगी। 1,79,300 शीशियों के साथ, उत्तर प्रदेश तीसरा सबसे बड़ा आवंटन है, जिसमें डॉ रेड्डीज को छोड़कर सभी फर्मों से आपूर्ति की जा रही है। जबकि महाराष्ट्र, गुजरात और उत्तर प्रदेश जैसे राज्य रेमडेसिवीर इंजेक्शन की कमी का सामना कर रहे हैं, कर्नाटक जैसे राज्यों ने उल्लेख (मेंशन) किया है कि उनके पास पर्याप्त मात्रा में दवा मौजूद है।

भारत में रेमडेसिवीर की कमी को देखते हुए, भारत सरकार ने भी इसकी उपलब्धता को बढ़ाने के लिए, इसका आयात (इंपोर्ट) करना शुरू कर दिया है। इस बीच, सरकार ने देश में रेमडेसिविर उत्पादन की क्षमता भी बढ़ा दी है। 27 अप्रैल तक, 7 स्वीकृत घरेलू उत्पादकों की मासिक निर्माण क्षमता 38 लाख शीशियों से बढ़कर 1.03 करोड़ शीशियों तक हो गई थी। 11 अप्रैल से 28 अप्रैल तक, दैनिक आपूर्ति 67,900 शीशियों से बढ़कर 2.09 लाख शीशी हो गई थी। गृह मंत्रालय (मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स) (एम.एच.ए.) ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों (यूनियन टेरिटरीज़) को रेमेडिसविर की बिना किसी रुकावट आपूर्ति के लिए, इसके हस्तांतरण (ट्रांसफर) में मदद करने के लिए सिफारिश जारी की।

भारत में रेमडेसिविर की उपलब्धता बढ़ाने के लिए भारत सरकार ने इसके निर्यात (एक्सपोर्ट) पर रोक लगा दी है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि यह इंजेक्शन आम जनता के लिए सस्ता है, तो नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (एन.पी.पी.ए.) ने 17 अप्रैल को अधिकतम (मैक्सिमम) रिटेल प्राइस को कम कर दिया, जिससे सभी प्रमुख ब्रांडों की लागत 3,500 रुपये प्रति शीशी से कम हो गई थी। केंद्र सरकार ने इसके उत्पादन और उपलब्धता को बढ़ाने के लिए रेमडेसिवीर इंजेक्शन, इसके ए.पी.आई. और इसके निर्माण में इस्तेमाल होने वाले बीटा-साइक्लोडेक्सट्रिन को 31 अक्टूबर तक कस्टम ड्यूटी से छूट दी है। वर्तमान आपूर्ति की कमी के मुख्य कारणों में से एक, देश में रोगियों की कम संख्या के कारण 2021 के जनवरी और फरवरी में दवा उत्पादन में कटौती या रुकावट है।

जब हम कमी के बारे में बात करते हैं, तो रेमडेसिवीर ही एकमात्र चिकित्सक सहायता नहीं है जो वर्तमान में कई जगहों पर उपलब्ध नहीं है बल्कि कई अन्य महत्वपूर्ण चिकित्सा उपकरण और इससे जुड़ी चीजें बाजार में कमी का सामना कर रही हैं, जैसे कि ऑक्सीजन सिलेंडर की कमी। एक उदाहरण जो लिया जा सकता है वह है गरारे करने के लिए बीटाडीन समाधान, पहले लोग अपने उपयोग के लिए केवल एक बोतल खरीदते थे, लेकिन वर्तमान परिदृश्य (सिनेरियो) को देखते हुए, जो लोग इसे खरीद सकते हैं वे अब उसी की 4-5 बोतल खरीद रहे हैं।

ऐसे कई उदाहरण हैं जहां लोग रेमडेसिवीर इंजेक्शन के अवैध व्यापार में पाए जाते हैं और उनमे से कुछ इस प्रकार हैं:

  1. ड्रग कंट्रोल एडमिनिस्ट्रेशन (डी.सी.ए) के अधिकारियों ने एक ऑपरेशन में, विशाखापट्टनम में रेमडेसिवीर इंजेक्शन की कालाबाजारी करने के आरोप में दो लोगों को पकड़ा। उनके पास से तीन कोविफोर इंजेक्शन (हेटेरो) और तीन रेडिक्स-एल इंजेक्शन (डॉ रेड्डीज) बरामद किए गए, साथ ही 44,000 रुपए नकद भी बरामद किए गए।
  2. बेंगलुरु पुलिस ने कहा कि उन्होंने दो अलग-अलग मौकों पर 5 लोगों को, रेमडेसिवीर इंजेक्शन दवा की अनुशंसित (रेकमेंडेड) डोस को आठ से दस गुना अधिक रेट पर बेचने के लिए हिरासत में लिया था। इन पांचों लोगों को बेंगलुरु नॉर्थ डिवीजन पुलिस ने दो अलग-अलग मामलों में गिरफ्तार किया था। आरोपी बैंक प्रबंधक (मैनेजर) ने इन शीशियों को बेचने के लिए एक भोले-भाले सब्जी विक्रेता का उपयोग किया, जिसने खरीदारों को इसे यह कहते हुए बेचा कि उसके पास ये दवाइयां हैं क्योंकि उसके एक रिश्तेदार की हाल ही में कोविड से मृत्यु हो गई थी और परिवार के पास ये दवाएं थीं और वह, यह दवाइयां पैसे के लिए बेचना चाहता है क्योंकि उसने इनको खरीदने के लिए वास्तविक तौर पर भुगतान किया था।
  3. दिल्ली पुलिस को रेमडेसिवीर दवा के अवैध कारोबार को लेकर एक गुमनाम सूचना मिली थी। पुलिस के अनुसार, रेमडेसिवीर इंजेक्शन, जो कि कोरोना वायरस संक्रमण में वृद्धि के कारण उच्च मांग में थे, उनकी कथित रूप से काला बाजारी करने के आरोप में दिल्ली के विभिन्न वर्गों (सेक्शंस) से 5 लोगों को हिरासत में लिया गया था। प्रारंभिक (इनिशियल) गिरफ्तारी साउथ दिल्ली में की गई थी जहां 3 लोगों को पकड़ा गया था, और 2 अन्य को वेस्ट दिल्ली में गिरफ्तार किया गया था।

यह कुछ मामले हैं जिनकी रिपोर्ट की गयी थी, हालांकि, महामारी के समय में रेमडेसिवीर दवा की कमी अभी भी स्थानीय अधिकारियों और सरकार के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है।

बाजार में रेमडेसिवीर दवा की कमी की इस समस्या से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने कई उपाय किए हैं और ऐसा ही एक उपाय, अस्पतालों को वैक्सीन की सीधी आपूर्ति है। जिस चैनल के जरिए अस्पतालों में रेमडेसिवीर दवा की आपूर्ति की जाती है, उस पर सरकार सख्ती से नजर रख रही है। इसका मुख्य उद्देश्य, इस चैनल से मिडिलमैन को खत्म करना है। मिडिलमैन उन महत्वपूर्ण कारकों में से एक हैं जिनके माध्यम से शीशी की कमी हो जाती है और यहां तक ​​कि अनुचित व्यापार प्रथाएं भी होने लगती हैं।

बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा की गई कार्रवाई

बॉम्बे हाई कोर्ट ने, कोर्ट ऑन इट्स ओन मोशन बनाम स्टेट और अन्य के मामले में, ऑक्सीजन और रेमडेसिवीर दवा की आपूर्ति पर सुओ मोटो कॉग्नीज़ेन्स लिया। न्यायमूर्ति सुनील सुकरे और न्यायमूर्ति एस.एम. मोदक की दो सदस्यीय पीठ ने मामले की सुनवाई की थी। हाई कोर्ट में सुनवाई, मुख्य रूप से दो मुद्दों को लेकर हुई हुई थी: जीवन रक्षक दवा “रेमडेसिवीर” की उपलब्धता और कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों को ऑक्सीजन प्रदान करना।

19 अप्रैल, 2021 को, कोर्ट ने अधिकारियों को दवा की 10,000 से अधिक शीशियों को नागपुर भेजने का आदेश दिया था। हालांकि, आदेश का पूरी तरह से पालन नहीं किया गया था, और केवल कुछ ही शीशियों को वितरित किया गया था। नागपुर के डिवीजन कमिश्नर ने 19 अप्रैल, 2021 और 21 अप्रैल, 2021 के बीच दवा की आपूर्ति पर विवरण (डिटेल्स) प्रस्तुत किए, जो कोर्ट के आदेश का आधा है। इसके अलावा, यह कहा गया कि एक नोडल एजेंसी, अगले दिन तक सरकारी और निजी अस्पतालों में रेमडेसिवीर दवाओं की 6752 शीशियों का वितरण करेगी। कोर्ट को यह भी जानकारी दी गई, जिसमें 7 दवा कंपनियों ने 22 अप्रैल, 2021 तक उपलब्ध होने वाली रेमडेसिवीर शीशियों की संख्या बताई थी। कोर्ट ने जॉइंट कमिश्नर जेड, फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन, नागपुर को जुबिलेंट कंपनी की आपूर्ति के बारे में जानकारी इकट्ठा करने और उसे कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया क्योंकि कोर्ट में कंपनी की आपूर्ति के बारे में कोई भी जानकारी उपलब्ध नहीं करायी गयी थी। कोर्ट में गवाही देने वाले दवा के क्षेत्र के विशेषज्ञों के अनुसार, सभी 7 दवा कंपनियों के पास एक महीने में रेमडेसिवीर दवा की 88,00,000 शीशियों का निर्माण करने की क्षमता है और यह देश में गंभीर कोविड मरीजों के लिए काफी है। दवा की काला बाजारी को मिटाने के लिए कोर्ट, कंपनियों को आदेश दे सकती है कि वह सभी राज्यों में दवा के वितरित करने की प्रक्रिया (प्रोसेस) को सुव्यवस्थित (स्ट्रीमलाइन) करे, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि पूरे देश में दवाओं की कमी न हो। कोर्ट ने भारत के एडिशनल सॉलिसिटर जनरल को देश भर में उचित और समान आपूर्ति सुनिश्चित करने के साथ-साथ ड्रग कंट्रोलर एक्ट, 1950 के तहत किए जाने वाले उपायों पर सेंट्रल ड्रग कंट्रोलर से आदेश लेने और शक्ति का प्रयोग करने का आदेश दिया और साथ ही दवा की अत्यधिक स्टॉकिंग और कालाबाजारी से बचने के लिए अन्य लागू और प्रासंगिक (रिलेवेंट) कानून इस्तेमाल करने का आदेश भी दिया। अपने आदेश में, हाई कोर्ट ने यह भी दावा किया कि संकट के समय में, इस तरह के अभूतपूर्व उपाय करना महत्वपूर्ण है ताकि कुछ बेईमान लोगों को जीवन रक्षक दवा की काला बाजारी में शामिल होने से रोका जा सके। यह कहा गया कि कोर्ट अलग नहीं बैठ सकती हैं और जीवन रक्षक दवाओं की काला बाजारी में लिप्त लोगों को एक स्पष्ट संदेश भेजने के लिए, जीवन रक्षक दवा की काला बाजारी के आरोपियों की जांच और उन पर किये गए मुकदमा को एक निष्कर्ष पर लाया जाना चाहिए, यह सुनिश्चित करने के लिए सबसे सफल दृष्टिकोणों में से एक है कि परीक्षण तेजी से समाप्त हो सके।

निष्कर्ष (कंक्लूज़न)

पिछली गर्मियों और बारिश के मौसम में भारत में नए कोरोना वायरस महामारी की शुरुआती लहर के दौरान व्यापक रूप से चर्चा में रहने वाला एंटीवायरल रेमडेसिवीर फिर से सामने आ गया है। जैसा कि देश बीमारियों की दूसरी लहर से लड़ रहा है, दवा की आपूर्ति कम है, और सरकार ने इसके निर्यात पर रोक लगा दी है। रेमडेसिवीर नेशनल ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल के अनुसार अस्पताल में भर्ती, कोविड-19 रोगियों के इलाज में उपयोग के लिए स्वीकृत प्रायोगिक (एक्सपेरिमेंटल) दवाओं में से एक है। जैसे-जैसे मामलों की संख्या बढ़ती जा रही है, वैसे-वैसे दवा की मांग भी बढ़ती गयी है।

जैसे-जैसे भारत में कोविड-19 मामलों की संख्या बढ़ी, वैसे-वैसे रेमडेसिवीर की मांग भी बढ़ी, जिसके कारण उसका अंधाधुंध (इंडिस्क्रिमिनेट) तरीके से उपयोग हुआ, जमाखोरी और कालाबाजारी हुई, जिसके परिणामस्वरूप आर्टिफिशियल कमी हुई जिससे इसकी लागत बढ़ गई। पिछले साल कोविड -19 चिकित्सा के लिए निर्धारित किए जाने से पहले, एंटीवायरल डोस का उपयोग गंभीर तीव्र श्वसन सिंड्रोम (सार्स) के रोगियों के इलाज के लिए किया जाता था। अवैध तरीके से इकट्ठा करने से रोकने के लिए, मंत्री ने सभी जिला अधिकारियों से यह गारंटी देने का आग्रह किया कि प्रत्येक इंजेक्शन का बुद्धिमानी से उपयोग किया जाए और कीमतों को सीमित किया जाए।

हाल के दिनों में, भारत के दवा रेगुलेटर, सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (सी.डी.एस.सी.ओ.) और विभिन्न राज्य सरकारों ने रेमडेसिवीर की जमाखोरी और कालाबाजारी पर चिंता व्यक्त की, जिसको कुछ मामलों में अधिकतम रिटेल मूल्य से 10 गुना अधिक पर बेचा जा रहा है। रविवार को, सोशल मीडिया पर इमेजेस में गुजरात में लोगों की लंबी लाइनों का खुलासा किया गया, जो कोविड -19 रोगियों के लिए रेमडेसिवीर इंजेक्शन लेने की प्रतीक्षा कर रहे थे। मध्य प्रदेश में भी मेडिकल स्टोरों के बाहर लोगों की लाइन लग गई, जिनमें से कुछ ने दवा नहीं खरीद पाने से नाराज होकर इंदौर में 9 अप्रैल को एक कुछ अवधि के लिए एक सड़क पर जाम लगा दिया।

गिलियड साइंसेज ने हर महीने लगभग 3.9 मिलियन यूनिट की स्थापित क्षमता के साथ 7 भारतीय फर्मों को स्थानीय उपयोग के लिए दवा का लाइसेंस प्रदान किया है।

केंद्र ने रविवार को घोषणा की कि, कोविड -19 संक्रमणों में वृद्धि होने के कारण, एंटीवायरल इंजेक्शन की बढ़ती मांग को देखते हुए, रेमडेसिवीर और इसके एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रेडिएंट्स (ए.पी.आई.) के निर्यात को राष्ट्र में स्थिति में सुधार होने तक रोक दिया गया है। निर्णय से कुछ दिन पहले कई कोर्ट्स में इस नई कोरोना वायरस बीमारी के इलाज के लिए इस्तेमाल की जाने वाली एंटीवायरल दवा या इंजेक्शन की कमी देखी गई। कुछ राज्यों में कई जगहों पर लोग दवा के लिए मेडिकल स्टोर के बाहर लाइन में खड़े हैं, क्योंकि हाल के दिनों में देश में कोरोना वायरस के मामले दैनिक ऊंचाई पर पहुंच गए हैं।

रेमडेसिवीर दवा की कमी की समस्या से निपटने के लिए सरकार ऐसे कड़े कदम उठाने को मजबूर है। केंद्र ने बढ़ती मांग के जवाब में रेमडेसिवीर की कमी को दूर करने के अपने प्रयास बढ़ा दिए हैं। कई राज्यों ने बढ़ती हुई रेमडेसिवीर की कमी के बारे में चिंता व्यक्त की है और केंद्र से संपर्क किया है, जिसके परिणामस्वरूप, केंद्र ने स्थिति से निपटने की कोशिश की है। रेमडेसिवीर की कमी से निपटने के लिए सरकार ने कई उपाय अपनाए हैं जैसे:

  1. अन्य देशों को वैक्सीन के निर्यात पर प्रतिबंध (प्रोहिबिशन)।

2. यह उपाय, देश की स्थिति में सुधार होने तक जारी रखा जाएगा।

3. कालाबाजारी की समस्या से निपटने के लिए राज्य सरकार द्वारा कदम उठाये गए है।

वैक्सीन की कमी को विभिन्न लोगों द्वारा एक व्यावसायिक अवसर के रूप में देखा जा रहा है और इसके परिणामस्वरूप, एक अवैध बाजार का जन्म हुआ है। विभिन्न दवाओं, खासकर रेमडेसिवीर की कालाबाजारी की समस्या को लेकर स्थानीय सरकार सख्त कदम उठा रही हैं।

  • स्टॉक सूची और वितरकों (डिस्ट्रीब्यूटर) का प्रदर्शन

स्थानीय अधिकारियों ने दवा बनाने वाली कंपनियों के साथ-साथ निर्माताओं से दवा की उपलब्धता के बारे में जानकारी देने को कहा है।

महाराष्ट्र हाई कोर्ट (नागपुर बेंच) द्वारा लिया गया सुओ मोटो कॉग्निजेंस अधिकारियों द्वारा किए गए प्रशंसनीय कार्यों में से एक है। हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि संकट के इस कठिन समय में लोगों को अनुचित व्यापार प्रथाओं में शामिल होने से रोकने के लिए इस तरह के कदम उठाना बहुत जरूरी है।

विशेष रूप से ऐसे कठिन समय के दौरान समस्या को खत्म करने के लिए संबंधित अधिकारियों को और अधिक एक्टिव होने की आवश्यकता है। राज्य और केंद्र स्तर पर सरकार को अधिक सख्त निगरानी नियमों को अपनाने की जरूरत है, ताकि वायरस से लड़ने में मदद करने वाली किसी भी चीज की काला बाजारी, उसकी जड़ों से खत्म हो जाए। यह एक ऐसी लढाई है, जिसे सरकार को अपने सभी आवश्यक संसाधनों का उपयोग करके लड़ना है, ताकि एक राष्ट्रीय त्रासदी (ट्रेजेडी) से बचा जा सके।

संदर्भ (रेफरेंसेस)

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