भारत में पंद्यम से संबंधित अनुबंधों का अवलोकन

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Indian Contract Act
What-is-Wagering-Contract

यह लेख Veena Reddy, द्वारा लिखा गया है, जो लॉसिखो से उन्नत अनुबंध प्रारूपण (ड्राफ्टिंग), वार्ता (नेगोशिएशन) और विवाद समाधान में डिप्लोमा कर रही हैं। इस लेख में वह पंद्यम (वेजर) से संबंधित अनुबंधों (कॉन्ट्रैक्ट) पर चर्चा करती हैं। इस लेख का अनुवाद Divyansha Saluja के द्वारा किया गया है।

परिचय

सरल शब्दों में पंद्यम, जुआ है। एक पंद्यम में, दो पक्ष शामिल होते हैं, दोनों भविष्य में एक अनिश्चित घटना के घटित होने पर एक निश्चित राशि का भुगतान करने का वादा करते हैं। सबसे आवश्यक तत्व यह है कि दोनों पक्षों के पास जीतने या हारने का समान अवसर होता है। यहां, पक्ष केवल लाभ या हानि के एकमात्र उद्देश्य के लिए एक अनुबंध में प्रवेश करते हैं और घटना में उनका कोई निहित स्वार्थ नहीं होता है। इसलिए, पंद्यम से संबंधित अनुबंधों को, दांव या जुआ अनुबंध माना जा सकता है। इस तरह के अनुबंध कानून की अदालतों में शून्य (वॉयड) और अप्रवर्तनीय (अनएंफोर्सेबल) होते हैं। यह लेख भारतीय कानून के तहत पंद्यम से संबंधित अनुबंधों का अवलोकन प्रस्तुत करता है।

भारत में पंद्यम से संबंधित अनुबंध

भारतीय अनुबंध अधिनियम, 1872 की धारा 30 पंद्यम  के अनुबंधों से संबंधित है, और इसमें कहा गया है कि “पंद्यम के माध्यम से किए गए समझौते शून्य हैं, और किसी भी पंद्यम पर जीतने के लिए कथित तौर पर किसी भी चीज की वसूली के लिए या किसी व्यक्ति को किसी भी खेल या अन्य अनिश्चित घटना जिस पर कोई पंद्यम लगाया गया है, के परिणाम का पालन करने के लिए कोई मुकदमा नहीं लाया जाएगा।” इस प्रकार, एकमात्र पहलू जो धारा 30 को शामिल करता है वह पंद्यम लगाने के अनुबंधों की शून्यकरणीयता है। यह एक पंद्यम की परिभाषा या आवश्यक तत्वों को शामिल नहीं करता है।

कार्लिल बनाम कार्बोलिक स्मोक बॉल कंपनी के ऐतिहासिक फैसले में, न्यायालय ने पाया था कि एक पंद्यम से संबंधित अनुबंध, एक ऐसा अनुबंध है जहां दो व्यक्ति भविष्य की अनिश्चित घटना के बारे में विपरीत विचार रखते हैं। पक्षों के बीच एक आपसी समझौता है जो अनिश्चित घटना के निर्धारण पर निर्भर करता है। समझौता यह निर्धारित करता है कि एक व्यक्ति दूसरे को धन या अन्य किसी वस्तु का भुगतान करेगा। अनुबंध में कोई वास्तविक प्रतिफल (कंसीडरेशन) नहीं है और दोनों पक्ष केवल उस राशि या हिस्सेदारी में रुचि रखते हैं जो वे प्राप्त करने या खोने जा रहे हैं। पंद्यम से संबंधित अनुबंध में यह आवश्यक है कि दोनों पक्ष या तो जीतें या हारें और जीतना या हारना घटना के घटित होने पर निर्भर करता है।

एक दृष्टांत (इलस्ट्रेशन) के माध्यम से पंद्यम से संबंधित अनुबंध की अवधारणा को समझाने के लिए, मान लें कि एक क्रिकेट मैच में मिस्टर A और मिस्टर B के बीच एक समझौता है कि अगर पीली टीम, लाल टीम के खिलाफ जीत जाती है, तो मिस्टर A 5000 रुपये का भुगतान करेगा और दूसरी ओर अगर लाल टीम पीली टीम के खिलाफ जीत जाती है, तो मिस्टर B 5000 रुपये का भुगतान करेंगे। इस तरह के एक समझौते की राशि एक पंद्यम के रूप में होती है क्योंकि न तो मिस्टर A और न ही मिस्टर B का मैच के परिणाम में सहमत शर्त के अलावा कोई अन्य निहित स्वार्थ है।

पंद्यम लगाने के अनुबंध के अनिवार्य तत्व

घटना की अनिश्चितता 

पंद्यम से संबंधित अनुबंध की पहली अनिवार्यता यह है कि किसी घटना का घटित होना अनिश्चित होना चाहिए, और पक्षों को इस बात का ज्ञान नही होना चाहिए कि घटना कब घटित होगी। एक पंद्यम ज्यादातर भविष्य की घटना से संबंधित होता है, लेकिन यह एक पिछली घटना भी हो सकती है। इसके लिए केवल यह आवश्यक है कि पक्ष इसके परिणाम से अनजान हों या इस चीज से अनजान हो की घटना कब हुई है।

उदाहरण के लिए, यदि शनिवार को बर्फ गिरती है तो X Y को 1000 रुपये का भुगतान करने के लिए सहमत होता है और Y शनिवार को बर्फ नहीं गिरने पर 1000 रुपये का भुगतान करने के लिए सहमत होता है। यहां, यह अनिश्चित है कि किसी विशेष दिन बर्फबारी होगी, जिसके लिए पक्षों ने एक निश्चित राशि का भुगतान करने पर सहमति व्यक्त की है। इस तरह का एक समझौता एक पंद्यम समझौता है और शून्य होता है।

लाभ या हानि होने का समान अवसर

दूसरी बात यह है कि प्रत्येक पक्ष को लाभ या हानि होने का समान अवसर होना चाहिए। इसके अभाव में, कोई पंद्यम नहीं होता है। बाबा साहब बनाम राजा राम, एआईआर 1931 बीओएम 264 के मामले में, पक्षों के बीच कुश्ती के लिए एक समझौता होता है और विजेता के लिए इनाम, बेची गए टिकटों की पूरी आय थी। अदालत ने कहा कि इस परिदृश्य (सिनेरियो) में विजेता को आर्थिक रूप से लाभ होगा, और मैच हारने वाले को अपनी जेब से कुछ भी नहीं देना होगा। मैच हारने वाला पुरस्कार जीतने का मौका चूक जाएगा, जो उससे अलग है कि उसे अपना कुछ खोना पड़ता है। एक पंद्यम में, महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि दोनों पक्षों को जीतने या हारने का समान अवसर मिलना चाहिए और घटना भी अनिश्चित होनी चाहिए। यहाँ ऐसा कोई समझौता नहीं था क्योंकि कुश्ती मैच के परिणाम के अनुसार किसी को हारना नहीं था। इसलिए, लाभ कमाने या हानि उठाने के समान अवसर की शर्त पूरी नहीं हुई है।  

अनियंत्रित घटना

घटना का घटित होना किसी भी स्थिति में दोनों पक्षों के नियंत्रण से बाहर होना चाहिए। यदि पक्षों में से एक घटना का प्रबंधन कर सकता है, तो लेन-देन में पंद्यम के एक बहुत ही महत्वपूर्ण घटक का अभाव है। उदाहरण के लिए, निक और हैरी एक समझौते में प्रवेश करते हैं कि अगर निक अपना होमवर्क 15 मिनट में पूरा कर लेता है, तो हैरी निक को 500 रुपये का भुगतान करेगा। और अगर निक ने निर्धारित समय के भीतर अपना होमवर्क पूरा नहीं किया तो निक हैरी को 500 रुपये देगा। हैरी को यहां, निक का कार्य पर नियंत्रण है और इसलिए, यह पंद्यम के तहत नहीं आएगा।

हिस्सेदारी या राशि में हित

किसी भी पक्ष को घटना के घटित होने में ही रुचि नहीं होनी चाहिए। दोनों पक्षों को केवल उस हिस्सेदारी या राशि में दिलचस्पी लेनी चाहिए जो वे जीतते हैं या हारते हैं। एक उदाहरण के साथ स्पष्ट करने के लिए, मान लें कि A, एक कार का मालिक, अपनी कार का बीमा भारतीय सामान्य बीमा निगम के साथ करता है। A को 100 रुपये प्रति माह का बीमा प्रीमियम देना होगा। यदि कोई दुर्घटना होती है और कार नष्ट हो जाती है, तो भारतीय सामान्य बीमा निगम को हुए नुकसान की वास्तविक राशि का भुगतान करना होगा। यहाँ A की रुचि उसकी कार में है। इसके अलावा, घटना के होने पर, यानी दुर्घटना पर, A को कुछ भी हासिल नहीं होगा। इसलिए, यह एक पंद्यम से संबंधित समझौता नहीं है।

पंद्यम से संबंधित अनुबंधों के अपवाद

घुड़दौड़

भारतीय अनुबंध अधिनियम की धारा 30, सदस्यता या योगदान या उसी से संबंधित एक समझौते के लिए एक वैधानिक अपवाद बनाती है, जो किसी भी घुड़दौड़ के विजेता को पुरस्कार के लिए है जिसकी राशि 500 रुपये या उससे अधिक है। के.आर. लक्ष्मणन (डॉ) बनाम तमिलनाडु राज्य, 1996 एससीसी (2) 226, में सर्वोच्च न्यायालय ने इस प्रश्न पर फैसला किया कि घुड़दौड़ खेल के दायरे में आती है या नहीं। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि घुड़दौड़ में जॉकी प्रशिक्षण (ट्रेनिंग) द्वारा विशेष योग्यता प्राप्त करते हैं, और घोड़ों को भी गति और सहनशक्ति के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। जॉकी घुड़सवारी में माहिर होते हैं और एक बेहतर प्रशिक्षित जॉकी केवल दो तेज दौड़ने वाले घोड़ों के बीच में ही विजेता के पद को छू सकता है। इसके आधार पर, सर्वोच्च न्यायालय ने माना कि घुड़दौड़ मद्रास सिटी पुलिस अधिनियम, 1888 की धारा 49A और मद्रास खेल अधिनियम, 1930 की धारा 11 के अर्थ के भीतर “मात्र कौशल” का खेल है।

बीमा लेनदेन

पंद्यम और एक बीमा लेनदेन कई मायनों में अलग हैं। बीमा का अनुबंध एक पंद्यम से संबंधित अनुबंध है यदि बीमाकर्ता का केवल बीमा के धन में ही हित है और बीमाकृत वस्तु में कोई रुचि नहीं है। बीमा लेन-देन में, इक्कठा हुआ ब्याज उस घटना पर होता है जो स्वयं बीमाकर्ता के हित को नुकसान पहुँचा रही है। किसी भी बीमा अनुबंध के पीछे एकमात्र उद्देश्य भविष्य में होने वाली किसी घटना से होने वाले नुकसान की भरपाई करना है। इसमें जीतने या हारने का कोई मकसद नहीं होता है। जबकि, दाँव लगाने के अनुबंध में, दोनों पक्ष उस राशि या हिस्सेदारी में रुचि रखते हैं जो वे जीतते हैं या हारते हैं। इस प्रकार, बीमा लेन-देन पंद्यम से संबंधित अनुबंध नहीं हैं, बल्कि उन्हें क्षतिपूर्ति (इंडेमनीटी) अनुबंध कहा जाता है।

कौशल से जुड़ी प्रतियोगिताएं

किसी भी प्रतियोगिता में सफलता के लिए कौशल बहुत बड़ी भूमिका निभाता है। जहां योग्यता के आधार पर पुरस्कार दिए जाते हैं, यानी यह किसी विशेष व्यक्ति के कौशल पर आधारित होता है, न कि मौके पर, ऐसी प्रतियोगिताएं पंद्यम नहीं होती हैं। हालांकि, यदि पुरस्कार एक मौके पर निर्भर करते हैं, तो यह एक पंद्यम है। उदाहरण के लिए, लॉटरी टिकट जीतना संयोग की बात है और इसमें कोई कौशल शामिल नहीं है, जो लॉटरी को पंद्यम बनाता है। हालाँकि, कुछ खेल, उदाहरण के लिए, रम्मी जिसमें मौके का एक तत्व होने के बावजूद, यह कौशल का खेल माना जाता है क्योंकि जीत या हार को मुख्य रूप से खिलाड़ियों के कौशल को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है, जैसा कि आंध्र प्रदेश राज्य बनाम के. सत्यनारायण और अन्य के मामले में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा आयोजित किया गया था। इसलिए, यह पंद्यम नहीं है। इसके अलावा, खेल प्रतियोगिताएं जैसे बैडमिंटन, लॉन टेनिस, टेबल टेनिस, बास्केटबॉल, फुटबॉल, क्रिकेट आदि कौशल द्वारा तय की जाती हैं और यह मौका के खेल नहीं हैं, इसलिए वे पंद्यम नहीं हैं।

शेयर बाजार

शेयर बाजार में व्यवसाय और निवेश करना अपने आप में पंद्यम नहीं है। ऐसा इसलिए है क्योंकि किसी कंपनी के शेयरों में निवेश करके, निवेशक अनिवार्य रूप से कंपनी के स्वामित्व का एक हिस्सा खरीद रहा है, जिससे उसे कंपनी के मुनाफे और नुकसान का एक हिस्सा मिल जाता है। इसके अलावा, शेयर बाजार में निवेश के माध्यम से पैसा बनाने के लिए, इसमें शामिल तकनीकी, जैसे स्टॉक चार्ट, कंपनी मेट्रिक्स आदि का कार्यसाधक ज्ञान होना अनिवार्य है। यह लेनदेन में कौशल के आवश्यक तत्व लाता है। आगे, चिमनलाल पुरुषोत्तमदास शाह बनाम न्यामात्रै माधवलाल में, बॉम्बे उच्च न्यायालय ने देखा कि सट्टे से संबंधित लेनदेन पंद्यम की श्रेणी में नहीं आता है। इसका मतलब यह है कि कानून माल, जमीन, स्टॉक आदि में उनके बाजार मूल्य में वृद्धि और गिरावट से लाभ कमाने के इरादे से व्यापार करने की अनुमति देता है।

जुआ और दांव जहां कानून द्वारा स्पष्ट रूप से अनुमति दी गई हो

सार्वजनिक जुआ अधिनियम, 1867 भारत के कुछ राज्यों द्वारा अपनाया गया है जो सार्वजनिक जुआ घर की स्थापना और संचालन पर रोक लगाता है। गोवा, दमन और सिक्किम केवल तीन भारतीय राज्य हैं जो कैसीनो की अनुमति देते हैं। गोवा और दमन में, गोवा, दमन और दीव सार्वजनिक जुआ अधिनियम, 1976 केवल 5 सितारा होटलों और अपतटीय (ऑफशोर) जहाजों में कैसीनो की स्थापना की अनुमति देता है। वह भी, राज्य सरकार की पूर्व अनुमति प्राप्त करने के अधीन है।

राज्य लॉटरी

लॉटरी में, पक्षों के पास अनिश्चित घटना के घटित होने के आधार पर जीतने या हारने का समान अवसर होता है, लेकिन घटना के घटित होने पर किसी भी पक्ष का नियंत्रण नहीं होता है। इसके अलावा, पक्षों के पास शामिल राशि या मूल्य धन के अलावा कोई अन्य हित नहीं है। इस प्रकार, लॉटरी पंद्यम की श्रेणी में आती है और शून्य है। लोगों को कानून की अदालतों में निवारण नहीं मिल सकता है, इसलिए भले ही उन्हें लॉटरी टिकट विक्रेता द्वारा धोखा दिया गया हो, पुरस्कार की राशि का दावा करने के लिए कोई कानूनी सहारा नहीं है। ज्योतिष चंद्रन बनाम ज़ी टेली फिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड में, जहां नौ विरोधी पक्षों के खिलाफ सेवा में कमी और विरोधी पक्षों की ओर से अनुचित व्यापार व्यवहार की शिकायत करते हुए एक उपभोक्ता शिकायत दर्ज की गई थी, इस आधार पर कि विपरीत पक्षों ने लॉटरी पुरस्कार की राशि एक करोड़ रुपये का भुगतान नहीं किया था, जो शिकायतकर्ता ने जीते थे। न्यायालय ने कहा कि दीवानी अदालत में एक लॉटरी लेनदेन शून्य और अप्रवर्तनीय है, तब सवाल उठता है कि क्या उपभोक्ता कानून में स्थिति किसी भी तरह से भिन्न होगी। मूल उपभोक्ता अधिकार माल की बिक्री और खरीद या विचार के लिए सेवाओं को किराए पर लेने या प्राप्त करने के अनुबंधों से प्रवाहित होता है। यदि अनुबंध स्वयं भारतीय अनुबंध अधिनियम की धारा 30 के मद्देनजर शून्य है, तो पंद्यम से संबंधित अनुबंध के पक्षकार के पास अनिवार्य रूप से उपभोक्ता कानून के अधिकार क्षेत्र में भी शून्य अनुबंध से कोई अधिकार प्राप्त नहीं होगा।

भारतीय दंड संहिता की धारा 294A, लॉटरी कार्यालय रखने या लॉटरी के उद्देश्य से किसी भी स्थान का उपयोग करने को कारावास या जुर्माना, या दोनों के साथ दंडनीय अपराध बनाती है। हालाँकि, यह प्रावधान राज्य सरकारों द्वारा अधिकृत (ऑथराइज) या संचालित लॉटरी के लिए एक अपवाद है। राज्य सरकारों द्वारा अधिकृत या संचालित लॉटरी (विनियमन) अधिनियम, 1998 के अधीन हैं, और वर्तमान में केवल तेरह भारतीय राज्य हैं जो राज्य लॉटरी का आयोजन करते हैं।

पंद्यम से संबंधित अनुबंधों की प्रवर्तनीयता

भारतीय अनुबंध अधिनियम की धारा 30 के अनुसार, पंद्यम के माध्यम से जीती गई कथित राशि या हिस्सेदारी की वसूली के लिए किसी भी अदालत में कोई मुकदमा कायम नहीं रखा जा सकता है। यहां तक ​​कि अगर कोई व्यक्ति पंद्यम के खेल में लगन से जीत भी जाता है, तो वह इस तरह के पंद्यम में जीती गई पुरस्कार राशि के लिए अदालत में नहीं जा सकता है, क्योंकि धारा 30 इन पंद्यम के समझौतों को शून्य बनाती है।

संपार्श्विक (कोलेटरल) अनुबंधों की प्रवर्तनीयता

घेरूलाल पारेख बनाम महादेवदास मैया में, निर्धारण के लिए जो प्रश्न आया वह यह था कि क्या पंद्यम के लेन-देन में प्रवेश करने के लिए साझेदारी करना अवैध था। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि ” इस तरह का एक [पंद्यम] अनुबंध, संपार्श्विक समझौता अनुबंध अधिनियम की धारा 23 के अर्थ में अवैध नहीं था।” इसलिए, पंद्यम से संबंधित अनुबंध में प्रवेश करने के इरादे से बनाई गई साझेदारी कानूनी और लागू करने योग्य होती है। एक भागीदार जिसने पंद्यम लगाने के अनुबंधों में हुए नुकसान का भुगतान किया था, वह अपने सह-साझेदारों से आनुपातिक (प्रोपोर्शनेटी) क्षतिपूर्ति वसूल करने का हकदार था। यहां, अदालत ने संपार्श्विक अनुबंधों के सिद्धांत को लागू किया, जो यह प्रदान करता है कि जब कोई मुख्य लेनदेन, कानून द्वारा लागू नहीं किया जा सकता है, तब भी यह लेनदेन संपार्श्विक की प्रवर्तनीयता को समाप्त कर देता है।

बद्रीदास कोठारी बनाम मेघराज कोठारी में, प्रतिवादी को कथित तौर पर वादी को कुछ शेयर पंद्यम के व्यापारिक सौदे, जिसे फ़तका कहा जाता है, के कारण धन की राशि का भुगतान करना था। प्रतिवादी ने वादी के पक्ष में फ़तका सौदे में निवेश की जाने वाली राशि के लिए एक वचन पत्र निष्पादित किया था। वचन पत्र में कहा गया है कि पैसे का भुगतान प्रतिवादी को नकद में किया गया था, लेकिन प्रतिवादी ने अलग तर्क दिया। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि भारतीय अनुबंध अधिनियम की धारा 30 के तहत फ़तका का लेन-देन एक पंद्यम के बराबर था, और इसलिए, प्रतिवादी ने तर्क दिया कि एक वचन पत्र एक फ़तका के कारण हुए कर्ज को चुकाने के लिए निष्पादित किया गया था। इससे, यह लेन-देन गलत हो गया, और कानून की अदालत द्वारा लागू नहीं किया जा सका। अदालत ने प्रतिवादी द्वारा दिए गए तर्क को स्वीकार कर लिया, जिससे यह माना गया कि इस मामले में निष्पादित वचन पत्र एक पंद्यम समझौता है, और इस प्रकार इसे एक संपार्श्विक अनुबंध से अलग किया।

निष्कर्ष

पंद्यम के समझौतों को भारतीय अनुबंध अधिनियम में परिभाषित नहीं किया गया है, जिससे कई मामलों में अस्पष्टता और कई व्याख्याओं के लिए जगह बनती है। पंद्यम से संबंधित समझौते अवैध नहीं हैं क्योंकि भारतीय अनुबंध अधिनियम की धारा 30 इस पहलू पर चुप है, बल्कि यह इसे एक शून्य समझौता बना देती है। इसलिए, यहां अनुबंध अधिनियम सिर्फ एक ऐसे समझौते के बीच अंतर करता है जो शून्य है और जिसका उद्देश्य या प्रतिफल गैरकानूनी है। अनुभाग कई पहलुओं पर मूक है, जो इस प्रकार धारा के दायरे को कम कर देता है। इससे न्यायपालिका को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। चूंकि धारा 30 में पंद्यम से संबंधित समझौते के संबंध में स्पष्टता का अभाव है, इसलिए इसे तस्वीर को स्पष्ट करने के लिए संशोधित करने की आवश्यकता है कि पंद्यम क्या होता है और इस खंड की सीमा को बढ़ाया जाना चाहिए, जिससे प्रचलित अस्पष्टता और न्यायविदों के सामने आने वाली असुविधा को दूर किया जा सके।

संदर्भ

  • Law of Contract and Specific Relief Author Avtar Singh, Ninth Edition.
  • https://legalserviceindia.com/article/l376-Wagering-Contracts.html 
  • https://legislative.gov.in/sites/default/files/The%20Lotteries%20(Regulation)%20Act,%01998.pdf

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